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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की बेटी IAS बनने से पहले मॉडल थी, अंजली बिरला के UPSC Exam क्लियर करने पर उठ रहे सवाल, सच्चाई आई सामने

Anjali Birla IAS: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) की बेटी अंजलि बिरला पर IAS बैकडोर एंट्री दावे की सच्चाई आई सामने। 

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Om Birla and his daughter Anjali Birla

Om Birla and his daughter Anjali Birla

Om Birla Daughter Anjali Birla: लगातार दूसरी बार ओम बिरला लोकसभा स्पीकर बने हैं। ओम बिरला ने गुरुवार 27 जून, 2024 को उन्होंने अपना पद ग्रहण किया और तब से वह चर्चाओं में हैं। बता दें कि वह अपने राजनीतिक सफर में कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं। दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें जो लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बने है। ओम बिरला ने राजस्थान की कोटा लोकसभा सीट से चुनाव जीता। इस बीच उनकी छोटी बेटी अंजली बिरला को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी और समाज सेवा में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए जानी जाने वाली अंजलि बिरला 2021 में IAS अधिकारी बनीं। अंजलि बिरला एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो रही हैं। उनके उल्लेखनीय सफलता के बावजूद, सोशल मीडिया पर खबरें फैल रही हैं कि उन्हें बिना परीक्षा दिए ही IAS अधिकारी बना दिया गया है।

अंजली बिरला की कहां से हुई पढ़ाई-लिखाई

अंजली की प्राथमिक शिक्षा राजस्थान के कोटा में ही हुई है। बारहवीं उन्होंने कोटा के सोफिया गर्ल्स कॉलेज से की है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के रामजस कॉलेज से ग्रेजुएशन की और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुट गईं। अंजली बिरला ने IAS अधिकारी बनने का श्रेय उनके पिता और बड़ी बहन आकांक्षा बिरला को दिया। उनका कहना है पिता ओम बिरला चाहते थे कि अंजली बिरला सिविल सेवा में अपना करियर बनाएं। 

Fact Check: अंजलि बिरला की न्यूज का पर्दाफाश

ट्विटर और फेसबुक यूजर्स ने अंजलि बिरला के IAS अधिकारी बनने में पक्षपात का आरोप लगाया है। कुछ ने तो यह भी दावा किया कि उन्होंने UPSC-CSE परीक्षा नहीं दी। हालांकि, सच्चाई यह है कि हर सिविल सेवा परीक्षा के बाद UPSC दो सूचियाँ तैयार करती है- मुख्य सूची और आरक्षित सूची। जबकि मुख्य सूची तुरंत प्रकाशित होती है, आरक्षित सूची तब जारी की जाती है जब मुख्य सूची के सभी उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्तियों का आवंटन कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया सिविल सेवा परीक्षा नियम, 2019 के नियम-16 (4) और (5) के तहत स्पष्ट रूप से निर्धारित है। मुख्य सूची से उम्मीदवारों को पद आवंटित करने के बाद, शेष रिक्तियों के लिए आरक्षित सूची से उम्मीदवारों को मेरिट के अनुसार चुना जाता है। UPSC की आरक्षित सूची कोई आरक्षण कोटा सूची नहीं है, बल्कि यह दूसरी मेरिट सूची या प्रतीक्षा सूची जैसी होती है। इस सूची से चुने जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि मुख्य सूची में आरक्षित श्रेणी के कितने उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के मानकों को प्राप्त कर चुके हैं।

2019 में, 927 रिक्तियां थीं और अगस्त 2020 में घोषित मुख्य परिणाम में 829 उम्मीदवारों के नाम थे। शेष पदों को आरक्षित सूची से भरा गया। इसका मतलब है कि 2019 UPSC-CSE में, 98 आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों ने सामान्य श्रेणी के मानकों को प्राप्त किया था। इनमें से 89 उम्मीदवारों ने सामान्य श्रेणी के लिए उपलब्ध सीटों का चयन नहीं किया, जो रिक्त रह गईं। फिर जनवरी 2021 में 89 उम्मीदवारों के नाम के साथ आरक्षित सूची जारी की गई। इस सूची में अंजलि बिरला का नाम 67वें क्रमांक पर था, जैसा कि आधिकारिक UPSC रिलीज़ के अनुसार है। सूची में 73 सामान्य, 14 OBC, 01 EWS और 01 SC श्रेणी के उम्मीदवार शामिल थे।

यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने UPSC परीक्षा दी थी और सभी चरणों को पार कर IAS अधिकारी बनीं। अंजलि बिरला के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे उनके और उनके पिता ओम बिरला की छवि को खराब करने के इरादे से किए जा रहे हैं। ऑनलाइन ट्रोलिंग और उत्पीड़न से निपटने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता है। इस समय वह रेल मंत्रालय में IAS अधिकारी के तौर पर काम कर रही हैं।