
Shab-e-Barat 2022
Shab-e-Barat 2022 : आज होली के साथ देशभर में शब-ए-बरआत का त्योहार मनाया जा रहा है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार यह रात पूर्व के समय में किए गए कर्मों का लेखा जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली मानी जाती है। इसलिए इस रात को शब-ए-बरआत के तौर पर जाना जाता है। इस महीने में अल्लाह ने वादा किया है कि अगर कोई अपने गुनाहों से माफी मांगे और उस गुनाह को दोबारा न करने का वादा करे तो उसके गुनाहों को माफ कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ होली का त्योहार होने के कारण पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट हो गया। दोनों समुदाय के त्योहार के कारण सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
तकदीर तय करने वाली रात
आज देशभर में शब-ए-बरआत मनाया जा रहा है। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग पूरी रात इबादत में गुजारने के साथ अपने बुजुर्गों की कब्रों पर जाकर उनकी मगफिरत की दुआ की जाएगी। शब-ए-बरआत को देखते हुए कब्रिस्तानों और मस्जिदों में तैयारियां शुरू हो गईं। शब-ए-बारात की रात को मुसलिम समुदाय के लोग अपनों की कब्र पर जाते है और उनके हक में दुआएं मांगते है।
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क्या होती है शब-ए-बारात की रात
मुसलमान औरतें इस रात घर पर रह कर ही नमाज पढ़ती हैं, कुरान की तिलावत करके अल्लाह से दुआएं मांगती हैं और अपने गुनाहों से तौबा करती हैं। इस्लाम धर्म के अनुसार इस रात अल्लाह अपनी अदालत में पाप और पुण्य का निर्णय लेते हैं और अपने बंदों के किए गए कामों का हिसाब-किताब करते हैं। जो लोग पाप करके जहन्नुम में जी रहे होते हैं, उनको भी इस दिन उनके गुनाहों की माफी देकर के जन्नत में भेज दिया जाता है।
रोजा रखने की फजीलत
इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। बरकत वाली इस रात में हर जरूरी और सालभर तक होने वाले काम का फैसला किया जाता है और यह तमाम काम फरिश्तों को सौंपा जाता है। मुसलिम समुदाय के कुछ लोग शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा भी रखते है। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि रोजा रखने से इंसान के पिछली शब-ए-बारात से इस शब-ए-बारात तक के सभी गुनाहों से माफी मिल जाती है।
Published on:
18 Mar 2022 09:59 am
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