
Women Reservation Bill In Rajya Sabha: आज संसद के विशेष सत्र का चौथा दिन है। लोकसभा से महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद अब राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा हो रही है। इस दौरान RJD सांसद और प्रोफेसर मनोज झा ने कहा- "यह मसाला हां और ना का नहीं है। यह मसला हमारे देश की तारीख से जुड़ा हुआ है। ये मसला इस बात से जुड़ा हुआ है कि जो प्रधानमंभी जी ने बीते दिनों सेंट्रल हॉल में कहा था कि छोटी कैनवास पर बड़ी पेंटिंग नहीं हो पायेगी। कैनवास बड़ा करना होगा, तभी आकृति बड़ी होगी।" इस पर जवाब देते हुए मनोज झा ने कहा इस बिल के माध्यम से बड़ा कैनवस तो बनाया गया है, लेकिन आकृति छोटी गढ़ी जा रही है और इतिहास इसका स्मरण करेगा। मनोज झा ने आगे कहा, "अगर चश्मा सरकार लगाती है तो उसका पावर बदलिए। जब आज यहां से उठिए तो ओबीसी वर्ग को एक कमिटमेंट दीजिए। नई व्यवस्था में पुराने वाले को बिना छूए आरक्षण देने से क्रांति आएगी। हमारा सरनेम एक प्रिविलेज है, लेकिन उन सरनेम को देखिए, जिनका प्रिविलेज नहीं है।"
अटल बिहारी वाजपेयी की कविता भी पढ़ी
उच्च सदन में मनोज झा ने कहा मौजूदा समय में परिसीमन आयोग 2008 के मुताबिक सामान्य के लिए 412 सीट है। जबकि SC के लिए 84 और ST के लिए 47 सीट रिजर्व हैं। लेकिन मोदी सरकार इस नए बिल के माध्यम से उन 131 आरक्षित सीटों में ही एक तिहाई सीट SC-ST महिलाओं के लिए रिजर्व करने जा रही है, यह इस वर्ग की महिलाओं के साथ अन्याय नहीं है। मनोज झा ने आगे कहा सरकार को वंचित समाज की महिला को अधिकार देने के लिए नजरिए में बदलाव लाने की जरुरत है।
इसके बाद मनोज झा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता पढ़ी की
न मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं।
इसके बाद अंत में उन्होंने मशहूर कवि ओमप्रकाश वाल्मीकि की भी एक कविता पढ़ी जिसके माध्यम से अपने अंदर के ठाकुरों को मारने के ऐलान किया
फिर अपना क्या?
Published on:
21 Sept 2023 04:24 pm
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