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लोकतंत्र की पहली सीढ़ी से दूर हो रहे युवा, ग्राम सभाओं पर कम हुआ भरोसा

Gram Sabha: ग्राम सभाओं के प्रति युवाओं का रुझान कम होता जा रहा है। ग्राम सभा का पहले जितना प्रभाव था, अब वो काफी कम हो गया है।
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भारत

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Tanay Mishra

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Shadab Ahmed

Jul 02, 2026

Gram Sabha

ग्राम सभा (File Photo)

देश में लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन अहम इकाई ग्राम सभा (Gram Sabha) अब नए संकट का सामना कर रही है। नया संकट है कि गांव की नई पीढ़ी इनसे लगातार दूर होती जा रही है। ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग अब ग्राम सभा को समस्याओं के समाधान का प्रभावी मंच नहीं मान रहा है। पंचायती राज मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) के देशव्यापी अध्ययन में सामने आया है कि ज़्यादातर राज्यों में युवा ग्राम सभाओं का सबसे कम प्रतिनिधित्व वाला वर्ग बनकर उभरे हैं। बैठकों में चर्चा होने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं दिखने से लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है। अध्ययन ने इस स्थिति को 'ग्राम सभा पार्टिसिपेशन फैटिग' यानी भागीदारी के प्रति घटते उत्साह की स्थिति बताया है।

क्या हैं ग्राम सभा से दूर होने के कारण?

एनआईआरडीपीआर ने यह अध्ययन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ग्राम सभा की वास्तविक स्थिति जानने के लिए किया। इसमें ग्राम सभा के सदस्य, निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत अधिकारी और ग्रामीण नागरिक शामिल किए गए। हर राज्य में अलग-अलग सैंपल लिया गया। ग्राम सभा से दूर होने के कारणों पर गौर किया गया, तो पता चला कि रोजगार, खेती, मजदूरी, पढ़ाई और पलायन की वजह से युवाओं का ग्राम सभाओं के प्रति रुझान कम हुआ है और दूरी बढ़ी है।

शिकायतें होती है दर्ज, कार्रवाई बेहद कम

ग्राम सभाओं तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। अध्ययन में शामिल हुए ग्रामीणों में से 66.4% ग्रामीणों ने संचार व्यवस्था को प्रभावी बताया, जबकि 67.32% लोगों ने कहा कि उन्हें बैठकों की जानकारी सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से मिलती है। 86.78% लोगों ने माना कि ग्राम सभा में शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन सिर्फ 63.29% मामलों में ही आगे कार्रवाई होने की जानकारी मिली। इससे साफ है कि ग्राम सभाओं की बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार लोगों की अपेक्षाओं से कम है।

इन राज्यों में हुए प्रभावी प्रयोग

केरल - ग्राम सभा को स्थानीय विकास योजना का केंद्र बनाया गया है।

पंजाब - शादी के निमंत्रण-पत्र की तर्ज पर ग्राम सभा के आमंत्रण भेजे गए।

बिहार - स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्राम सभाओं से महिलाओं को जोड़ा गया।

असम - ग्राम सभाओं के ज़रिए घर-घर सूचना पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की।

झारखंड - ग्राम सभा को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया गया।

राजस्थान - ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बेहतर बनाया गया। साथ ही युवाओं को जोडऩे की ज़रूरत भी बताई गई। महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी को अपेक्षाकृत बेहतर बताया गया है, लेकिन युवाओं की कम मौजूदगी, आजीविका संबंधी बाधाओं वऔर बैठकों के निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रमुख चुनौती माना गया।

मध्यप्रदेश - ग्राम सभाओं पर भरोसा बढ़ाने की चुनौती देखी गई। ऐसे में ग्राम सभा के प्रति जागरूकता और उपस्थिति संतोषजनक मिली, लेकिन समय की कमी, रोजगार और कृषि कार्यों के कारण नियमित भागीदारी प्रभावित होती है। निर्णयों के पालन, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की ज़रूरत बताई गई है।

छत्तीसगढ़ - ग्राम सभाओं में भागीदारी पर आजीविका का असर देखने को मिला। ग्राम सभा के लिए बुनियादी ढांचा और डिजिटल सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर मिली। इसके बावजूद मजदूरी, खेती और रोजगार संबंधी व्यस्तताएं भागीदारी में सबसे बड़ी बाधा हैं। जागरूकता अभियान, घर-घर संपर्क और महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने से ग्राम सभाएं ज़्यादा प्रभावी बन सकती हैं।