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70 फीसदी घरों में उड़ रहा आज भी चूल्हे का धुआं

-नि:शुल्क गैस कनेक्शन मिलने के बावजूद ३० प्रतिशत लोग ही भरवा रहे दोबारा गैस-नहीं छूट रही लोगों की लकड़ी कन्डे पर रोटी बनाने की आदत।

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mitti ka chulha kaise banate hain

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नीमच. धुएं से होने वाले प्रदूषण व बीमारियों को रोकने के उद्देश्य से शासन द्वारा उज्जवला योजना प्रारंभ कर घर घर गैस कनेक्शन पहुंचाने की पहल की, ताकि घरों में होने वाले धुएं के दुष्प्रभाव से बचा जा सके साथ ही पर्यावरण का विस्तार भी हो। इस योजना के तहत महिलाओं को बिना किसी डिपाजिट के गैस कनेक्शन भी उपलब्ध कराए गए। लेकिन समस्या आज भी जस की तस नजर आ रही है। क्योंकि मात्र ३० प्रतिशत हितग्राही ही घरेलु गैस की दोबारा रिफिलिंग करा रहे हैं। ऐसे में पीएम का सपना भी अधूरा रहता नजर आ रहा है।
बतादें की २० अप्रैल २०१६ से प्रारंभ हुई उज्जवला योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। जिसमें हितग्राही से केवल चूल्हा, नली, डायरी, व सिलेंडर में भरी गैस की राशि ली जाती थी, वह भी आने वाले दिनों में उपभोक्ता को मिलने वाली सब्सिडी में से काटी जाती थी। ताकि हितग्राही तुरंत योजना का लाभ लेते हुए अपने घरों में घरेलु गैस उपयोग करें। इस योजना के तहत जिले में स्थित करीब २४ गैस एजेंसियों के माध्यम से करीब २५०० गैस कनेक्शन तक नि:शुल्क बांटे गए। ताकि गांव गांव में सुबह शाम उडऩे वाले धुएं से पर्यावरण को बचाया जा सके।
नहीं करवा रहे अधिकतर हितग्राही दोबारा रिफिलिंग
उज्जवला योजना के तहत अधिकतर उन लोगों ने गैस कनेक्शन प्राप्त किए, जिनके घरों में सालों से चुल्हे जलते आ रहे हैं। इन घरों में चाय बनाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य चुल्हे पर किए जाते हैं। इन लोगों ने शासन की योजना के तहत नि:शुल्क गैस कनेक्शन का लाभ तो ले लिया, लेकिन एक बार उपयोग के बाद मात्र ३० प्रतिशत लोगों द्वारा ही दोबारा गैस रिफिलिंग करवाई गई है। जिससे साफ पता चल रहा है। कि महिलाओं की रूचि अभी भी घरेलु गैस उपयोग करने में नहीं हैं। क्योंकि उन्हें आज भी लकड़ी कंडे आसानी से उपलब्ध होने के साथ ही सबसे सस्ता ईंधन लगता है। यही कारण है कि जहां आम उपभोक्ताओं के गैस रिफिलिंग का आकंडा ८० प्रतिशत के करीब रहता है। वहीं योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने वालों का आंकड़ा ३० प्रतिशत भी पार नहीं कर रहा है।
उज्जवला योजना का किया विस्तार
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत वे हितग्राही ही पात्र होते थे, जिनका नाम सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना २०११ की लिस्ट में होता था, इस कारण कई लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे थे, जिसके चलते योजना में बदलाव किया गया, वर्तमान में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना विस्तारित शुरू की गई है। जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अंत्योदय अन्न योजना में पात्र महिला हितग्राही को भी नि:शुल्क गैस कनेक्शन का लाभ दिया जा रहा है। जिसके तहत इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में आयोजन कर गैस कनेक्शन वितरित किए जा रहे हैं।
अब सब्सिडी में से ६ माह बाद कटेगी राशि
योजना के तहत पहले गैस कनेक्शन तो हाथों हाथ दे दिया जाता था, लेकिन किसी भी प्रकार का एक रुपया भी हितग्राही नहीं लिया जाता था, लेकिन गैस चुल्हा आदि की राशि हितग्राही को मिलने वाली सब्सिडी में से काटी जाती थी, इस कारण अधिकतर हितग्राही दोबारा गैस रिफिलिंग कराने से बच रहे थे, क्योंकि उन्हें सीधे ७०० से ८०० रुपए रिफिलिंग में खर्च होना नजर आता था, जबकि गांव में लकड़ी कंडे मुफ्त में मिल जाते हैं। इस कारण दोबारा रिफिङ्क्षलग कराने में उपभोक्ताओं की रूचि न के बराबर नजर आने लगी। ऐसे में उपभोक्ता गैस कनेक्शन होने के बावजूद भी घरों में चुल्हे का उपयोग कर रहे हैं। इस कारण शासन ने यह निर्णय लिया कि गैैस कनेक्शन लेने के बाद छह माह तक करवाई जाने वाली गैस रिफिलिंग के दौरान उन्हें सब्सिडी की राशि मिलेगी, इसके बाद ही सब्सिडी की राशि से चुल्हे आदि की राशि काटी जाएगी, ताकि तब तक हितग्राही को गैस का उपयोग करने की आदत हो जाए।
नाम न बताने की शर्त पर महिलाओं ने बताया कि घरेलु गैस की रिफिलिंग कराने पर करीब ७२५ से ७५० रुपए तक लगते हैं। जबकि गांव में कन्डे, लकड़ी आसानी से और बिल्कुल फ्री मिलती है। क्योंकि गांव में जंगल भी काफी पास होता है। साथ ही पशु होने के कारण कंडे भी बन ही जाते हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्र में सबसे सस्ता ईंधन आज भी चुल्हे को माना जाता है। इस कारण गैस रिफिलिंग कराना काफी महंगा नजर आता है।
वर्जन.
भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह योजना काफी लाभप्रद है, इस योजना का मुख्य उद्देश्य धुआ रहित र्इंधन प्रदान करते हुए धुएं से होने वाले दुष्प्रभाव को रोकना है। शासन ने उज्जवला योजना का विस्तार करने के साथ ही यह भी तय किया है। कि गैैस कनेक्शन लेने के बाद करीब छह माह तक करवाई जाने वाली गैस रिफिलिंग की सब्सिडी की राशि हितग्राही के खाते में डाली जाएगी। ताकि घरेलु गैस के उपयोग के प्रति लोगों की खासकर ग्रामीण क्षेत्र के रहवासियों की रूचि बढ़े।
-श्याम नरेडी, संचालक, श्याम गैस एजेंसी