5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक रेलवे स्टेशन जहां होता है कुछ ऐसा कि यात्री कह उठते हैं वाह-वाह

नीमच रेलवे स्टेशन पर "कुआ जाता है प्यासे के पास"

3 min read
Google source verification

नीमच

image

Mukesh Sharaiya

Apr 23, 2022

एक रेलवे स्टेशन जहां होता है कुछ ऐसा कि यात्री कह उठते हैं वाह-वाह

प्लेटफार्म पर इस तरह स्टील की बड़ी टंकियों में शीतल पेयजल भरकर यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है।

मुकेश सहारिया, नीमच. कहावत है प्यास लगने पर प्यासे को ही कुए के पास जाना पड़ता है। कुआ कभी प्यासे के पास नहीं आता। लेकिन नीमच रेलवे स्टेशन पर पिछले करीब 24-25 वर्षों से यह कहावत उलट साबित हो रही है। यहां कुआ प्यासे की तलाश में ट्रेन की एक-एक बोगी तक पहुंचता है। जब तक सभी यात्रियों के कंठ तर नहीं हो जाते तब तक वे लोग हार नहीं मानते। झुलसा देने वाली गर्मी में शीतल पेयजल से कंठ तर होने के बाद यात्रियों के दिल से निकली दुआ ही उनके लिए आशीर्वाद है।

यात्रियों की प्यास बुझाने नि:स्वार्थ भाव से समर्पित है सदस्य
'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया' ऐसा ही कुछ नीमच रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रहा है। पिछले करीब २४-२५ सालों से (कोरोना संक्रमण छोड़कर) रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली हर टे्रन के यात्रियों की सेवा में 'जल सेवा समिति नीमच' के सदस्य लगे हैं। प्रारंभ में वरिष्ठ समाजसेवी और भाजपा के कद्दावर नेता रहे गट्टूलाल शर्मा ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर रेल यात्रियों को पेयजल वितरण का कार्य प्रारंभ किया था। वे तो यात्रियों को छाछ तक पिलाते थे, ताकि गर्मी में उनका सफर आसानी से कट जाए। उनके समय से जो जनसेवा का कार्य प्रारंभ हुआ है तो आज तक निर्वाध रूप से जारी है। नए लोग जुड़ते गए पुरानों का साथ छूटता गया, लेकिन जलसेवा का कार्य पूरी निष्ठा और समर्पण भाव से जारी है।

8 लाख रुपए की लागत से लगाया आरओ प्लॉट
समिति के सक्रिय सदस्य ओमप्रकाश अग्रवाल यूं तो तेल का व्यापार करते हैं, लेकिन अब उन्हें उनके अनुकर्णीय कार्य की वजह से 'पानीवाला' कहने लगे हैं। बकौल अग्रवाल जल सेवा समिति नीमच में करीब 42-45 सदस्य हैं। सभी सदस्य रेल यात्रियों की सेवा में सदैव समर्पित रहते हैं। यात्रियों को शुद्ध पेयजल मिले इसके लिए रेलवे प्रशासन की अनुमति से स्टेशन पर वर्श 2020 में करीब 8 लाख रुपए की लागत से 'आरओ प्लॉट' लगाया गया है। यह राशि जनसहयोग से जुटाई गई है। आरओ प्लॉट लगने के बाद से यात्रियों को 100 टीडीएस का शुद्ध पेयजल नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि यहां प्यासे को कुए के पास आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सदस्य ही प्रत्येक बोगी तक पहुंच यात्रियों को ट्रेन में ही बोटल आदि में पानी भरकर दे देते हैं। शीतल पेयजल मिलने से लम्बी दूरी के अधिकांश यात्री नीमच में ही भोजन-नाश्ता करना पंसद करते हैं। इस कार्य में रेलवे अधिकारियों-कर्मचारियों का भी सराहनीय (अप्रत्यक्ष रूप से) योगदान मिलता है।

10 हजार लीटर प्रतिदिन पेयजल वितरण
जल सेवा समिति नीमच के सदस्य सुबह 9 से रात 10 बजे तक रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए पेयजल वितरण कार्य लगे रहते हैं। इस दरमियान करीब 10 टे्रेनें आती हैं। इन टे्रनों के यात्रियों को औसत 500 केन (20 लीटर) से 10 हजार लीटर पानी प्रतिदिन नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। पेयजल वितरण कार्य में स्कूली बच्चे, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी, मंडी व्यापारी, आमजन आदि नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। जो लोग पेयजल वितरण करते हैं सभी आर्थिक रूप से काफी सम्पन्न हैं। 'जल ही जीवन है' के ध्येय वाक्य को सार्थक करने वर्षों से तन, मन, धन से लगे हैं। इसके चलते ही चित्तौडग़ढ़ (राजस्थान) और रतलाम के बीच नीमच रेलवे स्टेशन पर ही सबसे शुद्ध और शीतल पेयजल उपलब्ध है।

स्वयं करते हैं प्लेटफार्म की सफाई
नीमच रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के गुजरने के बाद प्लेटफार्म पर फैला पानी भी हम समिति के सदस्य ही साफ करते हैं। पानी बिखरा होने से प्लेटफार्म पर लोगों के फिसलने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में कोई हादसा न हो इसके लिए समिति के सदस्य तुरंत वायपर से पानी साफ कर देते हैं। समिति के इस पुनीत कार्य में लोग मुक्त हस्त से साल में एक बार सहयोग भी करते हैं। नीमच रेलवे स्टेशन पर दो प्लेटफार्म हैं। दोनों पर समिति की ओर से पेयजल वितरण की व्यवस्था की गई है। आरओ से पानी शुद्ध होने के बाद जो पानी व्यर्थ निकलता है उसे ट्यूबवेल में पुन: डाल देते हैं। इससे पानी बर्बाद नहीं होता है।
- ओमप्रकाश अग्रवाल पानीवाला, सदस्य जल सेवा समिति नीमच