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जमीन की खातिर परिषद में भिड़े पार्षद, एक दूसरे पर चलाए लात-घूंसे

विवादित नामांतरण के प्रस्ताव पर भाजपा के पार्षद भी दो खेमे में बंटे, विवाद के बीच विकास प्रस्तावों को हरी झंडी

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councilor fights

नीमच। नगर पालिका के विशेष सम्मेलन में जमीनों के विवादित नामांतरणों संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों के बीच लात-घूंसे तक चल गए।खास बात यह है कि भाजपा के पार्षद भी इस विवादित मुद्दे पर दो खेमे में बंट गए। करीब आधा दर्जन से अधिक पार्षदों ने परिषद के सम्मेलन से बहिर्गमन भी किया। परिषद के इस सम्मेलन के पहले ही एजेंडे में लाए गए नामांतरण के विषय पर विपक्ष ही नहीं बल्कि भाजपा के कुछ पार्षदों को भी आपत्ति थी। सम्मेलन से पहले चर्चा के लिए नपा कार्यालय में अध्यक्ष राकेश जैन पप्पू की मौजूदगी में भाजपा पार्षदों की बैठक आयोजित की गई। पार्षदों का एक खेमा इस प्रस्ताव के सख्त खिलाफ था।

उन्होने अध्यक्ष से इस प्रस्ताव को बार-बार सम्मेलन में न लाने की बात कही तो समर्थक खेमा किसी भी प्रकार इस प्रस्ताव पर बहुमत की सहमति दिलवाने के लिए जी तोड़ मशक्कत कर रहा था। अध्यक्ष भी बैठक समाप्त कर रवानगी लेने लगे तो बाहर फिर से उनके पार्षदों ने ही उन्हें घेर लिया। करीब डेढ़ घंटा देरी से अध्यक्ष राकेश जैन नपा भवन में होने वाले परिषद के सम्मेलन में पहुंचे। उनके पहुंचते ही कांगे्रस के पार्षदों ने नपा के नियम कायदों का हवाला देकर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में भी मनमानी करने के आरोप लगाए तो अध्यक्ष ने उनसे देरी के लिए क्षमा मांगी और कार्रवाई प्रारंभ कराने की बात कही।

चर्चा के पहले ही आपस में उलझ गए
सम्मेलन के एजेंडे में 95 प्रस्तावों पर चर्चा कर निर्णय लिया जाना था। लेकिन सम्मेलन के प्रारंभ होते ही स्कीम नंबर 34 के विभिन्न भूखंडों के विवादित नामांतरणों को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने जमकर मोर्चा खोला। उन्होने आरोप लगाया कि बार-बार सम्मेलनों में विवादित नामांतरण के प्रस्ताव लाए जा रहे हैं, इसमें भाजपा के पार्षदों की मिलीभगत है।जिन प्रस्तावों पर पूर्व में विवाद हो चुके हैं उन्हें फिर से परिषद के सामने लाने का क्या औचित्य है। भाजपा के कुछ पार्षदों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस के पार्षद मोनू लोक्स और योगेश प्रजापति अपने हाथों में तख्तियां लेकर सम्मेलन में पहुंचे जिन पर लिखा था भाजपा के तीन साल के कार्यकाल में भूमि घोटाले हुए। लोक्स और अन्य पार्षदों ने स्कीम नंबर 34 के विवादित नामांतरण के प्रकरणों पर परिषद में ही अस्वीकृत करने की बात कही। इस पर भाजपा के कुछ पार्षद मुखर हो गए। दोनो के बीच तनातनी होने लगी इस बीच भाजपा के विष्णु बिंदल का घुंसा लोक्स के मुंह पर लगा। इसके बाद लोक्स भी उग्र हो गए। हालांकि दोनो तरफ के पार्षदों ने बीचबचाव कर पार्षदों को अलग किया, लेकिन विवाद नहीं थमा। कांग्रेस के पार्षदों ने इस प्रस्ताव में भारी लेनदेन के आरोप लगाए। अध्यक्ष ने विवादित नामांतरण के प्रस्ताव को कलेक्टर के पास भेजने की बात कही तो इस पर भाजपा के कुछ पार्षदों ने असहमति जताई।उनका पक्ष में निर्णय देने पर जोर था, जबकि कांग्रेस के पार्षद चाहते थे कि कलेक्टर के पास भेजने पर जो सही नामांतरण हैं वे भी परेशानी में आ जाएंगे। इस प्रस्ताव को आगामी बैठक में लाने के निर्णय पर भी पार्षदों ने असहमति जताई।

इन पार्षदों ने सम्मेलन से बनाई दूरी
विवादित प्रस्ताव पर भाजपा पार्षदों के एक खेमे ने सख्त रूख अपनाया। प्रस्ताव के विरोध में भाजपा पार्षद दिनेश यादव, शोभारानी विजय बाफना, सुशीला बहादुरसिंह, सुमित अहीर, लता राजेंद्र पटेल, शारदा टेलर, एल्डरमेन भीमसिंह सैनी, मीनू लालवानी आदि ने परिषद के सम्मेलन से बहिर्गमन कर दिया। प्रस्ताव पर चर्चाके दौरान भाजपा के लगभग 20 पार्षद ही मौजूद रहे। बाद में पार्षद सुमित अहीर और भीमसिंह सैनी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि विवादित नामांतरण प्रस्ताव भाजपा के ही पार्षद राजेश अजमेरा की मिलीभगत से लाया जा रहा है।इस तरह के प्रस्ताव भूमाफियाओं के इशारे पर लाए जा रहे हैं। गलत के साथ न अध्यक्ष हैं न भाजपा। इस कारण बहिर्गमन किया है। इस मामले में धारा 323 के तहत कलेक्टर को शिकायत की जाएगी।

अध्यक्ष ने कहा चांटा मार दूंगा, पार्षद-दूसरा गाल आगे कर दूंगा
विवाद के दौरान कांग्रेस पार्षद साबिर मसूदी भी अपनी बात कहना चाहते थे, इसके लिए वे आसंदी पर जाकर दो बार माइक ले आए। फिर से जब आसंदी पर मसूदी पहुंचे तो इस बार अध्यक्ष का पारा गर्म हो गया, उन्होने तपाक से कहा कि अब चांटा मार दूंगा, कुछ पलों के लिए तो सम्मेलन में सन्नाटा छा गया लेकिन बाद में विवाद और गहरा गया। मसूदी ने कहा कि मैं भी आप ही की तरह चुना हुआ प्रतिनिधि हूं। फिर अपने अंदाज में मसूदी ने कहा कि हम महात्मा गांधी के अनुयायी हंै, आप एक गाल पर मारेंगे तो दूसरा गाल आगे कर देंगे, हम मोदी भक्त नहीं हैं। लेकिन सच के लिए झुकेंगे नहीं लड़ाई लड़ेंगे। इस तरह धमकियों की आड़ में मनमानी नहीं चलने देंगे। आखिरकार पूरा सम्मेलन का करीब ढाई घंटा विवादित नामांतरण के प्रस्ताव पर बहस और झगड़े में ही पूरा हो गया।

विकास कार्यों को मिली मंजूरी
इस विवादित प्रस्ताव के अलावा विभिन्न वार्डों में सीसी रोड़, पुलियाओं, डामरीकरण, सड़कों का निर्माण, नाली निर्माण, सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने, वाहन एवं फायर ब्रिगेडक्रय करने, चालकों की अस्थायी भर्ती करने, बगीचों की बाउंडरी, विभिन्न मार्गों पर विद्युत पोल शिफ्टिंग, मांगलिक भवन निर्माण आदि विकास कार्यों के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी गई।

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