
इस तरह जान जोखिम में डाल मुख्य मार्ग पर ही बिजली के तारों के नीचे बस पर सामान लोड किया जाता है।
नीमच. जिले की जनसंख्या साढ़े ८ लाख के करीब है। इस तुलना में बसों की संख्या औसत से कम है। ऐसे में भेड़ बकरियों की तरह यात्रियों को बैठाया जाता है। इतना ही नहीं यात्रियों को बस में बैठाने के लिए जोर आजमाईश भी होती है। इससे विवाद के हालात बनते हैं। इसपर अब तक सख्ती से रोक नहीं लग सकी है।
नहीं लिया अब तक हादसों से सबक
वर्षों पहले सवारियां बैठाने की बात को लेकर सेंधवा में एक निजी बस के चालक व कंडक्टर ने दूसरी बस में आग लगा दी। हादसे में 10 मासूम व महिलाओं की मौत हो गई थी। इस घटना से प्रदेश स्तर पर हंगामा खड़ा कर दिया था। कुछ दिनों तक बसों में सख्ती दिखाई दी थी, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया हालात जस के तह बनते चले गए। आज एक बार फिर बसों में यात्रियों को बैठाने का ेलेकर बस संचालक, चालक, कंडेक्टर और बस स्टैंड पर तैनात कर्मचारी दबाव बनाते दिखाई देने लगे हैं। यात्रियों को बैठाने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनती है। ५ से १० मिनट के अंतर से बसें होने की वजह से स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी रहती है। प्रायवेट बस स्टैंड पर सबसे अधिक विषम परिस्थितियां निर्मित होती हैं। यहां सवारियां बैठाने और बस के समय को लेकर जूतमपेजार होती रहती है। बस स्टैंड पर जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से बड़े हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। पत्रिका ने पड़ताल की तो पाया कि शहर में भी सवारियों को लेकर प्रतिदिन बस संचालकों में तू-तू, मैं-मैं होती रहती है। यात्रियों के बस में बैठने के बाद भी संचालकों को भिड़ते देखा जा सकता है। बस संचालक अपनी कमाई को अधिक महत्व देते हैं। यात्रियों को मिलने वाली सुविधा की ओर बस संचालकों का जरा भी ध्यान नहीं है।
आवश्यक दस्तावेज के बिना दौड़ते वाहन
प्रायवेट बस स्टैंड पर प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में बसों की आवाजाही होती है। बस मालिक भी बिना पुलिस वेरिफिकेशन के कर्मचारी रख लेते हैं। वर्चस्व की लड़ाई को लेकर बस संचालक रंगदारी से भी परहेज नहीं करते। इसके चलते कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। जिले भर में बिना परमिट कई वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग इस मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई को अंजाम नहीं दे पाया। विभाग की लापरवाही का खामियाजा परमिट वाले बस मालिकों को भुगतना पड़ रहा है। वे टैक्स भी भर रहे हैं और अवैध परिवहन के कारण नुकसान भी उठा रहे हैं। परिवहन विभाग की अनदेखी के चलते न तो जिले में कई ड्रायवरों के पास लाइसेंस हंै और न ही उनके लिए ड्रेस कोड ही अब तक तय किया गया। लाइसेंस और डे्रस कोड की योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई। आरटीओ स्वयं स्वीकार करती हैं कि बस संचालक व चालक अपने साथ आवश्यक दस्तावेज नहीं रखते हैं। इस बारे में चेतावनी देने के बाद अब तक किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई है।
निर्धारित रूट पर नहीं चलती बसें
जिले में बस संचालन के लिए परिवहन विभाग ने रूट भी तय किए हैं। इनमें से कई बसें अपने निर्धारित रूट पर नहीं चलती। इसका खामियाजा ग्रामीण यात्रियों को सबसे अधिक उठाना पड़ता है। निर्धारित समय पर गंतव्य तक जाने के लिए बसें उपलब्ध नहीं हो पाती। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है। कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। मंदसौर, मनासा, नीमच से निम्बाहेड़ा, जावद रूट पर कई बसें बिना परमिट या खस्ताहाल दौड़ रही हैं। इसे रोकने के लिए अब तक प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आई है।
यह होना चाहिए बसों में सुविधाएं
- यात्री वाहन में दो दरवाजे अनिवार्य होना चाहिए।
- वाहन के अंदर आग बुझाने का यंत्र अनिवार्य रूप से होना चाहिए। समय-समय पर जांच होना चाहिए।
- वाहन में वैध दस्तावेज बीमा, फिटनेस, परमिट, चालक का ड्रायविंग लायसेंस हमेशा साथ होना चाहिए।
- वाहन मेें क्षमता से अधिक सवारियां नहीं बैठाई जाए।
- आपराधिक प्रवृत्ति के कर्मचारी नहीं रखे जाएं।
- वाहन का संचालन निर्धारित समय पर ही किया जाए।
- वाहन के आगे भाग पर वाहन का आगमन एवं प्रस्थान का समय लिखा जाए।
- वाहन में आपातकालीन खिड़की होना चाहिए।
- चालक-परिचालक निर्धारित वर्दी पहने एवं अपने नाम की पट्टिका लगाएं।
- वाहन में किराया सूची प्रदर्शित करें एवं नियम-103 के पालन में विंड स्क्रीन पर दस्तावेजों का विवरण (परमिट, फिटनेस, बीमा की वैधता आदि) लिखे।
कई अनियमितताएं आईं थी सामने
समय समय पर बसों की औचक जांच करते हैं। पिछले दिनों बसों की जांच भी की थी। कुछ अनियमितताएं सामने आई थी। इस संबंध में बस मालिकों को हिदायत दी थी। जैसे चालक व कंडेक्टर ने वर्दी नहीं पहनी थी। वाहन के मूल दस्तावेज वाहन की बजाय घर पर होने की बात कही गई। लाइसेंस भी साथ में नहीं था। इस प्रकार की अनियमितताओं के चलते चालानी कार्रवाई की गई थी। बस चालकों की मनमानी को रोकने के लिए जल्द फिर से कार्रवाई की जाएगी।
- बर्खा गौड़, आरटीओ
Published on:
28 Nov 2017 01:15 pm
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