नीमच। जिले में रविवार देर रात बारिश ओर ओलावृष्टि से रबी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है, शहर सहित आसपास के अंचल व गांव में बेमौसम हुई बारिश ओलावृष्टि और उसके साथ चलने वाली हवाओं के कारण खेत में खड़ी फसलें आड़ी हो गई है। किसानों पर आपदाओं का संकट हमेशा रहा है। वर्ष 2022 खरीफ सीजन में बाद, सूखा और बारिश ने फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया था। किसानों की करोड़ों रुपये की फसलें बर्बाद हो गईं थी, फिर कीट रोगों ने किसानों की फसलों का नुकसान किया था।
किसान कैलाश धाकड़ ओर सुरेश चंद धाकड़ ने बताया कि इस समय खेतो में धनिया,गेंहू,सरसों,मसूर अफीम,अलसी,सहित अन्य फसल फैल रही है जिसमें बारिश से काफी नुकसान हुआ कई किसानों ने खेतों में फसलों को इक_ा करके तिरपाल ढांककर बचाने की जुगत बिठाई थी लेकिन तेज हवा के कारण कई जगह तिरपाल उड़ गए या फट जाने से फसलें भीग गई।किसानों का कहना हें की रबी की फसलें मावठों के कारण प्रभावित हो रही है जिससे फसलों का उत्पादन ओर गुणवत्ता दोनो प्रभावित हुई है कई किसान तो लागत भी नहीं निकल पाने से चितिंत है ऐसे में किसानों ने बारिश ओर ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है
अधिकांश फसल बर्बाद
सावन गांव के जीतू पाटीदार ने बताया कि रात को बारिश और ओलावृष्टि ने अधिकांश फसल को बर्बाद कर दिया है। खासकर मूंडला, पिपल्या मिच्र, बोरदिया, लसूडिया हांड़ा, मांगरोल, बोरदिया खुर्द, छायन व गुलाबखेड़ी सहित अन्य क्षेत्र में काफी ओलावृष्टि हुई है। जिससे गेंहू, मैथी, कंलोजी और अलसी की फसल को भारी नुकसान हुआ है। यहां तक तो अफीम की पकी फसल भी नष्ट हो गई है। एक किसान एक बीघा में करीब चार किलो अलसी का बीज डालता है, जिसकी कीमत करीब 25 हजार आती है, वहीं कंलोजी करीब एक से सवा किलो जो कि करीब 18 हजार रुपए की कीमत रखती है। इसी प्रकार मैथी एक बीघा में 5 किलो डाली जाती है। जिसकी कीमत भी करीब 30 हजार रुपए होती है। वहीं गेंहू भी एक बीघा में 25 किलो डाला जाता है। वहीं प्रत्येक फसल में निंदाई का खर्च प्रत्येक बीघा 10 से 12 हजार आता है। इस प्रकार किसानों को काफी भारी नुकसान हुआ है।
बैमोसम बारिश में भारी नुकसान
चीताखेड़ा गांव के किसान दशरथ माली ने बताया कि बैमोसम बरसात के साथ ओलावृष्टि से फसलों को एक बार फिर भारी नुक़सान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि झमाझम बारिश और ओलावृष्टि से जीरे , ईसबंगोल औषधिय फसलों को नुकसान हुआ है। मैथी, अलसी, गेहूं , सहित रबी की फसलें पानी के साथ ओलावृष्टि व तेज हवा से सभी फसलें खेतों में जमिन पर आडी हो गई, जिससे पैदावारी में भारी नुक़सान होगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही फसलों में हुए नुकसान का मौका मुआयना कर फसल बीमा और मुआवजा दिलाया जाए। पूर्व में भी खरीफ की फसलें लगातार अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसलें भी पानी से सडकर नष्ट हो गई थी। रबी की फसलों से कुछ आस बंधी थी पर प्रकृति ने उस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया।
इनका यह कहना है
छुटपुट बारिश की पूर्व में ही संभावना मौसम विभाग ने जताई थी, वहीं एक दिन और गरज के साथ बारिश की संभावना है। जो कि अभी तक सही निकल रही है। खासकर छुटपुट बारिश से कोई खास नुकसान नहीं है। लेकिन तेज हवा के साथ बारिश होने से मोटी फसल खासकर अफीम, अलसी, गेंहू व सरसों को नुकसान होता है। वह फसल धूप में उठ नहीं पाती है। पौधा मरता है। वहीं ओलावृष्टि जहां भी हुई है, उससे फसल को नुकसान ही है। खासकर मनासा क्षेत्र के किसानों से सूचना मिली है। लेकिन अभी विभाग से नुकसानी सूची प्राप्त नहंीं हुई है। अभी एक दिन और बारिश की संंभावना है।
– सीपी पचौरी, मुख्य वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र नीमच।