
डॉ. राजेंद्र ऐरन
मुकेश सहारिया, नीमच. पिछले दिनों नीमच में कैंसर से एक व्यक्ति की मौत ने कई प्रश्नों को जन्म दिया है। कैंसर एक असाध्य रोग है। कैंसर होने पर पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। ऐसे में आईएमए के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एथिक्स कमेटी मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रहे डॉ. राजेंद्र ऐरन ने उम्मीद की एक किरण जगाई है। उन्होंने कैंसर का नीमच में ही नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके लिए अब दर दर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मध्यप्रदेश में हर साल एक से सवा लाख को होता है कैंसर
नीमच जागरण मंच के डॉ. ऐरन ने बताया कि अब कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज नीमच में भी संभव है। केवल नीमच के लोगों के संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति एवं शासन के समन्वय से यह कार्य धरातल पर उतारा जा सकता है। कैंसर एक ऐसा डरावना रोग है जिसके शरीर में होने की जानकारी मात्र से ही व्यक्ति को मृत्यु साक्षात नजर आने लगती है। व्यक्ति शारीरिक, मानसिक रूप से तकलीफ के साथ ही आर्थिक रूप से भी कमजोर हो जाता है। उसे न केवल अपनी चिकित्सा पर बल्कि उसके साथ परिवहन पर तो व्यय करना ही पड़ता है। साथ में परिवार के वर्तमान तथा भविष्य में आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना होता है। आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने बताया कि भारत में लगभग 20 से 21 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष इस महामारी के चुंगल में आते हैं। मध्यप्रदेश में भी लगभग एक से एक लाख 25 हजार लोग प्रतिवर्ष इससे पीडि़त होते हैं। इनमें से केवल 10 से 12 प्रतिशत ही इस रोग की प्रारंभिक अवस्था में चिकित्सक तक आ पाते हैं। दुर्भाग्य से इसकी चिकित्सा महानगरों तक ही सीमित होती है जो काफी महंगी होती है।
जिला अस्पताल में उपलब्ध कराया जा सकता है कैंसर इलाज
डॉ. ऐरन ने बताया कि कैंसर चिकित्सा की 3 पद्धति होती है। शल्य चिकित्सा, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी। इनमें से कीमोथेरेपी (दवाइयों से कैंसर का इलाज) हर जिला स्तर पर संभव है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में दवाइयों के प्रोटोकॉल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित हो जाते हैं। मतलब सामान्य रूप से जो कीमोथेरेपी नीमच में दी जाएगी वही मुम्बई, दिल्ली, इंग्लैंड या अमेरिका में भी दी जाएगी। इसके परिणाम भी एक जैसे ही आएंगे। जो कीमोथेरेपी रोग के शुरुआत में दी जाएगी उसमें रोगी हर जगह ठीक होगा। जब कैंसर शरीर में फैला हुआ होगा तो रोगी की मृत्युदर अधिक होगी। चाहे रोगी नीमच में चिकित्सा ले रहा हो या महानगरों में। इन सब परिस्थितियों में मरीज पर जो आर्थिक भार पड़ेगा उसमें जमीन आसमान का अंतर होगा। जो काम महानगरों में लाखों रुपए का होगा वो नीमच में नाममात्र के खर्चे में हो जाएगा। इसके ऊपर सोने पे सुहागा यह होगा कि इसका उपचार जिला अस्पताल में नि:शुल्क होने लगे, वह भी महानगरों के समकक्ष।
टेलीमेडिसिन से भी मरीजों के लिए नि:शुल्क परामर्श संभव
डॉ. ऐरन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कैंसर रोगों के लिए एक ऐसी योजना का प्रावधान किया है। इसका हम समुचित लाभ उठाएं तो लगभग 90 प्रतिशत कैंसर रोगों की 43 प्रकार की दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध हो जाएगी। साथ ही नि:शुल्क कीमोथेरेपी नीमच में उपलब्ध कराई जा सकती है। मरीज या उसके परिजन चाहे तो शुरुआत में किसी महानगर में वरिष्ठ चिकित्सक को दिखा सकते हैं। वहां से इलाज का पर्चा ले आएं। इसके बाद नीमच में उसी अनुसार नि:शुल्क कीमोथेरेपी की व्यवस्था हो सकती है। डॉ. ऐरन ने बताया कि हम नीमच में टेलीमेडिसिन से भी मरीजों के लिए नि:शुल्क परामर्श की व्यवस्था करा सकते हैं। नि:शुल्क रोग परामर्श शिविर की व्यवस्था भी हर दो या तीन महीने में की जा सकती है। देश के 8 राज्यों और मध्यप्रदेश के करीब 20 जिलों में यह योजना अच्छी तरह चल रही है। इसके लिए प्रारंभिक तैयारियां नीमच में भी हुई पर कुछ तकनीकी, मानवीय व जनता में जागरूकता के अभाव के चलते जमीनी स्तर पर साकार नहीं हो पाई। सामूहिक प्रयास किए जाएं तो कैंसर जैसी असाध्य बीमारी का नीमच में ही नि:शुल्क उपचार संभव किया जा सकता है।
Published on:
13 Sept 2023 12:11 pm
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