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ऐसा क्या हुआ कि युवक ने छोड़ दी आईपीएस की नौकरी

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IPS IAS Letest News IN HINDI

आईपीएस पुनीत गेहलोद


नीमच. मन में कुछ करने की इच्छा थी तो एक जिद पकड़ ली। जिद पूरी करने के लिए हर स्तर पर जाकर काम किया। धीरे धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ते भी रहे। ऐसा नहीं कि लक्ष्य तक पहुंचने में व्यवधान नहीं आए, लेकिन जिद पूरी करने के लिए हर बाधा को पार किया। ऐसे हालात बन गए कि आईपीएस की नौकरी तक छोडऩे को तैयार हो गया।
हिन्दी माध्यम से की पढ़ाई और बने आईएएस
यह सुनने में अजीब से लगता होगा कि तीन-तीन महत्वपूर्ण पद होते हुए भी कोई अपने लक्ष्य के लिए कतना संघर्षशील हो सकता है। लेकिन यह हकीकत है। ऐसा कर दिखाया है नीमच जिले की मनासा तहसील निवासी पुनीत गेहलोद ने। उनकी माता विद्यावति गेहलोद वर्तमान में आदिमजाति छात्रावास कुकड़ेश्वर में अधीक्षिका है। पिता प्रवीण गेहलोद शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनासा में प्राचार्य हैं। बड़ी बहन चेतना गेहलोद ने भी एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है। उनका चयन महिला एवं बाल विकास विभाग में हुआ है। वर्तमान में वे रतलाम में पदस्थ हैं। एक सामान्य शिक्षक माता-पिता की देखरेख में आज पुनीत ने उन बुलंदियों को छुआ है जिसे छू पाने की लालसा तो अधिकांश होनहार बच्चों में होती है लेकिन वे उसे छू नहीं पाते। मनासा तहसील के आंतरीमाता में माता पदस्थ थीं तब प्राथमिक शिक्षा वहीं से ली। ६ठीं से आठवीं की शिक्षा शासकीय हाई स्कूल खजूरी से ली। आठवीं बोर्ड में जिले में टॉप किया तो लक्ष्य मिल गया था। इस बीच नीमच में उत्कृष्ट विद्यालय प्रारंभ हुआ तो ९वीं और १०वीं वहां से की। इसके बाद मनासा में उत्कृष्ट विद्यालय की शुरुआत हुई तो घर पर रहकर पढऩे का निर्णय लिया और ११वीं और १२वीं उत्कृष्ट विद्यालय मनासा से की।
बड़ी बहन के कहने पर दी एसपीपीएससी परीक्षा
मनासा से १२वीं करने के बाद ४ साल इंजीनियरिंग की। नौकरी करने का मन नहीं था तो स्वयं की सॉफ्टवेयर डवलपमेंट कम्पनी शुरू की। दो-ढाई साल कम्पनी चलाई। इस बीच बड़ी बहन चेतना एमपीपीएससी की तैयारी कर रहीं थी। उन्होंने समझाया तू भी परीक्षा दे। कम्पनी चलाते चलाते एमपीपीएससी की कोचिंग शुरू की। धीरे धीरे इसमें मन लगने लगा। इसके बाद यूपीएससी में जाने का लक्ष्य तय कर लिया। २०१४ में यूपीएससी की परीक्षा दी। सफलता नहीं मिली। इसी साल फिर एमपीपीएससी की परीक्षा दी और पहले प्रयास में ही डीएसपी पद चयन हो गया। कम्पनी बंद कर रीवा में डीएसपी पद पर ज्वाइन किया। भोपाल में ट्रेनिंग ली। इसी साल बड़ी बहन का महिला एवं बाल विकास विभाग रतलाम में चयन हुआ।
अब आईपीएस की नौकरी छोडऩे की तैयारी
डीएसपी की टे्रेनिंग के बीच पुनीत ने लक्ष्य हासिल करने की जिद नहीं छोड़ी और लगातार प्रयास करते रहे। एक बार विफल होने के बाद वर्ष २०१५ में फिर यूपीएससी की परीक्षा दी। इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में नाम नहीं आया। फिर भी मायूस नहीं हुए। टे्रनिंग के दौरान ही तैयारी करते रहे। इस बीच वर्ष २०१६ में आईपीएस में चयन हो गया। करीब एक साल डीएसपी की ट्रेनिंग लने के बाद नौकरी छोड़कर आईपीएस ज्वाइन किया। अच्छी बात यह रही कि काडर भी मध्यप्रदेश ही मिला। उम्मीदों को 'परÓ लग चुके थे। आईपीएस की हैदराबाद में ट्रेनिंग शुरू हुई। दिल लगाकर कर प्रशिक्षण में भाग लिया, लेकिन मन किसी अन्य लक्ष्य की ओर था। ट्रेनिंग के दौरान की फिर यूपीएससी की परीक्षा दी। 'ईश्वर भी उन्हीं लोगों की मदद करते हैं तो स्वयं अपनी मदद करते हैंÓ ऐसा की कुछ पुनीत के साथ हुआ। इस बार उनका आईएएस में चयन हो गया। दो-चार दिन में काडर भी मिल जाएगा। संभवत: २८ अगस्त तक ज्वाइनिंग भी हो जाए। ऐसे में आईपीएस की नौकरी छोड़ आईएएस ज्वाइन करेंगे पुनीत।
हिन्दी से काहे की शर्म
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है। इससे बोलने और पढऩे में काहे की शर्म। जो अंग्रेजी माध्यम के बच्चे कर सकते हैं वो सब काम हिन्दी माध्यम के बच्चे भी कर सकते हैं। मन में एक लक्ष्य लेकर चले और लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहतन करें तो कोई रुकावट बाधक नहीं बनती। यह बात सही है कि नीमच जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अभी काफी कुछ करने की आवश्यकता है। बच्चों को समय पर सही काउंसलिंग मिल जाए तो वे भी अपना भविष्य स्वयं संवार सकते हैं। मेरा चयन होने के बाद मनासा क्षेत्र से ही करीब ५०-६० लोगों के फोन मेरे पास आए हैं। उन्हें भी मैं नियमित मार्गदर्शन दे रहा हूं। नीमच जिले के लिए मुझसे जितना हो सकेगा उतना अवश्य करूंगा।
- पुनीत गेहलोद, आईएएस, मनासा (नीमच)