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समय रहते चेत जाए प्रशासन तो बेहतर!

निचली बस्तियों में जलभराव के बाद बीमारी फैलने की आशंका,पानी सिर से गुजरने के बाद होती है अधिकांश बार कार्यवाही

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editorial neemach

Aug 01, 2017

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नीमच/रतलाम। जिला मुख्यालय के गली मोहल्लों में कीचड़ और जलभराव होने से मच्छरों का प्रकोप बढऩे लगा है। मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके अब तक मलेरिया विभाग और जिला प्रशासन सतर्क दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकांश देखा जाता है जब समस्या सिर चढ़कर बोलने लगती है तब प्रशासन कुंभकर्णीय नींद से जागता है। आज हालात यह हैं कि जिला चिकित्सालय में ही प्रतिदिन 350 से 400 मरीज बुखार व मौसमी बीमारी से पीडि़त की पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों की स्थिति तो बिलकुल अलग ही है। वहां भी मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ रही है।


धरातल पर कुछ और ही है स्वच्छता अभियान

पिछले एक पखवाड़े में हुई अच्छी बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिले गए हैं वहीं अब जिला मुख्यालय पर निचली बस्तियों में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। कहने को तो नगरपालिका प्रशासन स्वच्छता अभियान चला रहा है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ ओर ही है। निचली बस्तियों में सड़ांध मारती गंदगी और जलभराव से क्षेत्रवासी परेशान हैं। परिणाम स्वरूप जिला अस्पताल में भी निरंतर मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालात यह बन गए हैं कि यदि समय रहते नगरपालिका और जिला प्रशासन ने मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के सार्थक उपाय शुरू नहीं किए तो अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए बिस्तर कम पड़ जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की माने तो मलेरिया और डेंगू बारिश के मौसम में ज्यादा होती है। इस मौसम में घरों के आसपास गंदा पानी और कीचड़ में मच्छर पनपते हैं। जो इन बीमारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं।


नहीं है डेंगू की जांच की सुविधा

जिला चिकित्सालय में डेंगू की जांच की कोई सुविधा नहीं है। यहां से डेंगू के संभावित मरीजों के ब्लड के सेम्पलों को माइक्रो बायोलाजी लेब इंदौर भेजा जाता है। जहां से मरीज के ब्लड सेम्पल की जांच कर डेंगू के मरीज की रिपोर्ट मंगवाई जाती है। हर साल डेंगू के मरीजों के सेम्पल जांच के लिए भेजे जाते हैं। इस बीच लक्षण के आधार पर ही मरीज का उपचार किया जाता है। जिला चिकित्सालय में डेंगू की जांच के साधन नहीं होने से इंदौर से रिपोर्ट आने तक डेंगू की बीमारी का पता नहीं चलने से मरीज को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


सकरी गलियों से गुजरना हुआ मुश्किल
अम्बेडकर कॉलोनी, मूलचंद मार्ग से लगी निचली बस्तियों में निवास करने वाले लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। यहां बारिश के बाद गलियों में भरा पानी सड़ांध मारने लगा है। मूलचंद मार्ग से लगी अम्बेडकर कॉलोनी में भी हालात बदतर हैं। यहां चहुंओर गंदगी पसरी है। जगह जगह जलभराव है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी नपा प्रशासन को नहीं है। बावजूद इसके अब तक मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए इन क्षेत्रों में सार्थक उपाय नहीं किए गए हैं। यहां स्वच्छंद विचरण कर रहे सुअर भी समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


डेंगू के लक्षण

- 24 घंटे बुखार बना रहना।
- गोलियां खाने के दौरान कुछ समय बुखार उतरना और वापस आ जाना।
- हाथ पैर जकडऩा और कोई काम नहीं कर पाना।
- कमर और घुटनों में तेज दर्द होना।
- रोशनी से दूर भागना।
- सिर में जकडऩ और तेज दर्द होना।
- अचानक बुखार आना।
- जोड़ों में दर्द होना व मासपेशियों में दर्द होना।
- उल्टी होना व शरीर में लाल चत्ते होना।
इन में से किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर मरीज को लापरवाही नहीं करके जांच करवा लेना चाहिए अन्यथा रोग बढऩे पर जानलेवा हो जाता है। इसी प्रकार से ठंड के साथ बुखार आने पर मलेरिया की आशंका रहती है। साथ ही मलेरिया में कपकपी छूटती है। सामान्यत: एडीज नामक मच्छर के काटने से डेंगू होता है और मादा मच्छर के काटने से मलेरिया।


इस प्रकार करे बचाव

- घर के आस पास जल भराव नहीं होने दें।
- मच्छर रोकने के लिए खिड़की दरवाजों पर हवादर पतली जाली लगाए।
- घर में नीम की पत्ती का धुआं करें।
- कूलर का पानी बदलते रहें।
- ऐसे कपड़े पहने जिससे पूरा शरीर ढ़का रहे।
- बुखार आने पर तुरंत डॉक्टरों से सम्पर्क करें।


जल्द करेंगे समस्याओं को दूर

नगरपालिका क्षेत्र में सफाई अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है। मुझे तो उम्मीद है कि नपा प्रशासन जिस सतर्कता से सफाई अभियान में जुटा है इससे मलेरिया और डेंगू फैलने की आंशका न के बराबर है। इसके लिए हम लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। फिर भी शहर में कहीं गंदगी या जलभराव जैसे हालात हैं तो इसे समस्या का भी तुरंत समाधान निकाल देंगे।
- राकेश पप्पू जैन, नपाध्यक्ष