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जयकारों के साथ निकला सिद्धितप के महान तपस्वियों का वरघोड़ा

जयकारों के साथ निकला सिद्धितप के महान तपस्वियों का वरघोड़ा

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जयकारों के साथ निकला सिद्धितप के महान तपस्वियों का वरघोड़ा

नीमच. भोजन में जरा सी देरी हो जाए तो मनुष्य व्याकुल हो जाता है। सिद्धितप करना अत्यन्त साहस का कार्य है जो आत्मबल से ही संभव है। कर्म किसी को नहीं छोड़ते कर्मो के चक्कर से कौन बचा है। कर्मो से वही प्राणी बच सकता है। जिसने कर्मो को समूल नष्ट कर दिया है। तपस्या के द्वारा कर्मो से मुक्त हो सकते हैं।

धर्म जिसके ह्दय में बसा हो उसको देवता भी नमस्कार करते हैं
यह बात साध्वी उपेन्द्र यशा श्रीजी मसा ने कही। वे रविवार को आराधना भवन पुस्तक बाजार में आयोजित धर्मसभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि धर्म जिसके ह्दय में बसा हो उसको देवता भी नमस्कार करते हैं। मन बड़ा प्रसन्न है कि आज तपस्वीयों ने तपस्या कर हमारा सपना साकार किया। उन्होंने कहा कि हमारा आत्म बल मजबूत है तो हम हर तपस्या कर सकते है व अपने आत्म बल को मजबूत कर सकते है। आज 10 तपस्वीयों ने आत्मबल मजबूत कर तपस्या की है। तपस्या शरीर को स्वस्थ बनाए रखती है। तपस्या व्यक्ति के मन को शुद्ध कर दुष्कर्मो से बचाती है धन्य है ऐसे सिद्धितप के महान तपस्वी को। जिन्होंने इतनी बड़ी तपस्या की है। सभी अनुमोदना करते है ।

तपस्वी बग्गी में सवार थे
इस अवसर पर समाज अध्यक्ष अनिल नागोरी ने कहा कि यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि तपस्वीयों ने तपस्या कर मसा की इच्छा को चरितार्थ किया है। सचिव मनीष कोठारी ने बताया कि भव्य वरघोड़ा सिद्धीतप की तपस्या के जुलूस में इन्द्रध्वजा लिए घोड़े, बैण्डबाजे, रथ में भगवान व तपस्वी बग्गी में शोभायमान थे। तपस्वी बग्गी में सवार थे उनकी अनुमोदना की स्वर लहरिया गुंज रही थी।
प्रवचन आज से प्रारम्भ
17 सितम्बर को सुबह 9 बजे से प्रतिदिन प्रवचन पुस्तक बाजार आराधना भवन में प्रारम्भ होगें । प्रात: 9 से 9.15 बजे तक भगताम्बर पाठ व उसके बाद प्रवचन होगें।