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VIDEO…पीपल की पूजा और परिक्रमा कर सुनी दशामाता की कथा, मांगी परिवार की खुशहाली की कामना

VIDEO...पीपल की पूजा और परिक्रमा कर सुनी दशामाता की कथा, मांगी परिवार की खुशहाली की कामना

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मनासा। मनासा में शुक्रवार को परंपरागत रूप से दशा माता पूजन का पर्व मनाया गया जिसको लेकर सुबह से ही महिलाओं ने पीपल के वृक्ष पर दशा माता का विधि विधान से पूजन शुरू किया, जो दोपहर तक चलता रहा। नगर के मुख्य मंदिरों पर जहा पीपल का वृक्ष था उन मंदिरों में पीपल के वृक्षों पर दशा माता पूजन के लिए भीड़ लगी रही। शहर के अल्हेड रोड स्थित मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर में प्राचीन पीपल का महिलाओं ने पूजन किया,मंदिर में सुबह 5 बजे से ही महिलाओं के आने का दौर शुरू हो गया था। 8 बजे से भीड़ और बढ़ गई। यहां मंदिर परिसर में ही बुजुर्ग महिलाओ द्वारा अन्य महिलाओं को दशा माता की कथा सुनाई जा रही थी,उपस्थित महिलाओं ने पूजन कर पीपल की परिक्रमा कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।

दशा माता की पूजा की ये हैं परंपरा
दशा माता व्रत चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है। सुहागिन महिलाएं यह व्रत अपने घर की दशा सुधारने के लिए करती हैं।? शुक्रवार को महिलाओं ने कच्चे सूत का 10 तार का डोरा, जिसमें 10 गठानें लगाते हैं, लेकर पीपल की पूजा की।इस डोरे की पूजन करने के बाद कथा भी ?सुनी। इसके बाद डोरे को गले में बांधा। इस व्रत में एक ही प्रकार का अन्न एक समय खाया जाता हैं। भोजन में नमक नहीं मिलाते। मान्यता अनुसार यह व्रत जीवन भर किया जाता है और इसका उद्यापन नहीं होता।

10 तार के धागे की माला का ये है महत्व
महिलाओं ने घर की बिगड़ी दशा सुधारने एवं घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और वैभव से परिपूर्ण रहने की कामना के साथ दशामाता का व्रत रखा। इसे निमाड़ में संपदा माता व्रत भी कहा जाता है। इस दिन व्रतधारी महिलाओं ने स्नान ध्यान के बाद पीपल के वृक्ष की हल्दी, कुंकुम, चने की दाल, दही, नारियल आदि से पूजन किया। इसके बाद पीपल के पेड़ की 10 परिक्रमा कर सूत का लपेटकर लक्ष्मी मैया से सुख-समृद्धि की कामना की। पूजन करने आई महिलाओं ने बताया की पूजन के बाद सभी महिलाएं सूत के धागे की 10 तार की माला बनाएगी। जिसमें 10 गठानें बांधकर उसे 10 दिनों तक अपने गले मे पहनेंगी। इसके पीछे यह मान्यता है कि इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं एवं सदा घर में निवास करती हैं। पूजन के पश्चात महिलाओं ने व्रत कथा का श्रवण भी किया। इस दौरान महिलाओं ने बताया कि इस पूजन के दौरान हल्दी के पांच छापे पीपल के पेड़ को लगाने के बाद पांच छापे घर के मुख्य द्वार पर लगाए जाते हैं। वहीं घर जाकर झाड़ू की पूजा की जाती है।