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नई मसूर लेकर मंडी पहुंचे अन्नदाता, कम दाम पर बेचने को मजबूर

समर्थन मूल्य से कम दाम पर बिक रही मसूर, भावांतर की अपेक्षा बाजार मूल्य में एक हजार की गिरावट

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नीमच। जहां सभी उपज समर्थन मूल्य से तेज दाम पर कृषि उपज मंडी में नीलाम होती है। वहीं मसूर समर्थन मूल्य से कम दाम नहीं बल्कि करीब १ हजार रुपए की कमी के साथ बिक रही है।
जबकि अन्नदाताओं का मनाना है कि मसूर कम से कम ५००० रुपए क्विंटल बिकना चाहिए, अन्यथा इसका उत्पादन भी धीरे-धीरे घटने लगेगा, क्योंकि अधिकतर किसान वहीं उपज बोता है जिसमें उसे लाभ मिले। रबी सीजन की फसल मसूर ने कृषि उपज मंडी में दस्तक दे दी है। शुरुआत में करीब १५० से २०० बोरी की आवक होने लगी है। लेकिन दाम जमीन पर ही नजर आ रहे हैं। क्योंकि शनिवार को मसूर २८०० रुपए प्रति क्विंटल से लेकर ३५०० रुपए क्विंटल तक बिकी, जबकि इस बार समर्थन मूल्य भी ४२५० रुपए है।
किसानों ने बताया कि एक बीघा में मसूर का बीज करीब ७-१० किलो लगता है। वहीं खाद्, उर्वरक आदि देने के बाद काफी खर्च हो जाता है। लेकिन उत्पादन मात्र एक बीघा में ३ से ४ क्ंिवटल की बैठता है। मसूर को बेचते हैं तो खर्च के लायक भी पैसा नहीं निकल पाता है। इस कारण मसूर के दाम कम से कम ५००० रुपए क्विंटल होने चाहिए। पिछले साल भी ४५०० रुपए क्विंटल तक बिक चुकी है।
मसूर लेन्टिल का समर्थन मूल्य वर्ष २०१६-१७ में ३ हजार ९५० था। जिसे वर्ष २०१७-१८ में बढ़कार ४१५० रुपए क्विंटल किया गया। वहीं १०० रुपए बोनस भी मसूर पर दिया जाएगा। इस मान से करीब ४२५० रुपए क्विंटल के दाम मसूर लेंटिल के भावांतर भुगतान योजना के तहत रहेेंगे। लेकिन वर्तमान में कृषि उपज मंडी में अच्छी से अच्छी मसूर ३५०० रुपए के दाम पर बिक रही है।

मसूर की फसल १ बीघा में ३ से ४ क्ंिवटल की पैदावार होती है। इस मान से मसूर के दाम कम से कम ५००० रुपए क्ंिवटल होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में ३५०० रुपए क्ंिवटल सबसे अच्छी मसूर के मिल रहे हैं। इससे निश्चित ही किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
-गोवर्धन टेलर, किसान,
आज कृषि उपज मंडी में मसूर २८०० से ३५०० रुपए क्ंिवटल के दाम पर नीलाम हुई। जबकि इसके दाम करीब ५००० रुपए क्ंिवटल होने चाहिए, क्योंकि समर्थन मूल्य भी ४२५० है। हमें नहीं पता था कि इतने कम दाम मिलेंगे, चूकि अब लेकर आ गए तो बेचना भी था ही सही।
-राहुल गुर्जर, किसान