नीमच. माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा मंगलवार को गणगौर की झेल निकाली गई। महिलाओं द्वारा गांधीवाटिका में गणगौर झेल से पूर्व विभिन्न खेल एवं गतिविधियां आयोजित की गई। इसके बाद बैंड बाजों पर गणगौर की धुन पर महिलाएं सिर पर कलश धारण कर झेल में शामिल हुईं।
झेल गांधीवाटिका से प्रारंभ होकर विजय टॉकीज चौराहा, पुस्तक बाजार, घंटाघर, शनि मंदिर चौराहा होते हुए माहेश्वरी भवन पहुंची। जहां गणगौर झेल का समापन गणगौर के झाले देकर किया गया। इस दौरान माहेश्वरी महिला मंडल की अध्यक्ष वैजयंती तोतला, अनिता समदानी,सचिव शारदा गट्ठानी, कंचन अजमेरा, मालती मूंदड़ा, मंजू समदानी सहित बड़ी संख्या में जमाज की महिलाएं उपस्थित थीं। भारत में मनाए जाने वाले कई त्योहारों में से एक गणगौर काफी प्रसिद्ध है। खासतौर पर राजस्थान और मेवाड़ में गणगौर धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। गणगौर में गण भगवान भोलेनाथ और गौर शब्द माता पार्वती के लिए प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर चैत्र पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार आस्था और प्रेम का बोधक है। गणगौर का पर्व फाल्गुन माह की पूर्णिमा (होली) के दिन से आरंभ होता है और अगले 17 दिनों तक चलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर मनाया जाता है। इस हिसाब से यह पर्व इस वर्ष 24 मार्च को आएगा। यह व्रत पत्नियां अपने पतियों की लंबी उम्र और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए रखती हैं। मंगलवार को माहेश्वरी समाज की ओर से निकाली गई झेल में बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं आकर्षक शृंगार करके पहुंची थी। महिलाओं ने परम्परागत वेष-भूषा धारण कर रखी थी। झेल में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हुए थे।