18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मां का दूध बच्चे के लिए है एंटी बायोटिक

-बच्चों के लिए मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार-कम से कम छह माह तक स्तनपान जरूरी

3 min read
Google source verification

image

editorial neemach

Jul 31, 2017



नीमच/रतलाम। जन्म लेने के छह माह तक बच्चा सिर्फ मां का दूध ही पचा सकता है। मां का दूध भी प्रकृति के अनुरूप होता है। जो गर्मी में पतला व सर्दी में गाढ़ा होता है। इसे न फ्रीज में स्टोर करने की जरूरत पड़ती है और न ही गर्म करने की आवश्यकता। मां का दूध बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार तो होता ही है। साथ ही बच्चे के लिए एंटी बायोटिक का काम करता है। जो छोटी मोटी बीमारियों से लड़ाने की भरपूर क्षमता रखता है।
आज देशभर में विश्व स्तनपान दिवस मनाया जाएगा। इसे सप्ताह के रूप में भी मनाया जाता है। चूकि आज भी कई माताएं अपने बच्चों को विभिन्न कारणों से स्तनपान नहीं करा पाती है। लेकिन उन्हें यह कोशिश करना चाहिए। कि वे अपने बच्चों को स्वयं का दूध पिलाएं। ताकि बच्चा स्वस्थ्य रहे।
कहावत है कि मां का दूध पिया है तो मैदान में आ, यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। क्योंकि मां के दूध में उतनी शक्ति होती है। जिससे बच्चा कई बीमारियों से लड़ सकता है। आजकल बाजार में डब्बा बंद दूध सहित अन्य ऐसे उत्पाद मिलते हैं। जो मां का दूध नहीं आने पर लोगों द्वारा बच्चों को दिए जाते हैं। लेकिन ध्यान दें उन उत्पादों पर भी स्पष्ट लिखा होता है कि मां का दूध शिशु के लिए सर्वेत्तम है। साथ ही ऐसे उत्पादों का प्रचार प्रसार भी बिल्कुल नहीं किया जाता है। इससे साफ पता चलता है कि बच्चे का दूध ही मां के लिए सर्वोत्तम आहार है।
मां के दूध, स्तनपान कराने के लाभ
-मां का दूध शिशु को निमोनिया रोग से 15 प्रतिशत तथा दस्त से 11 प्रतिशत बचाता है।
-शिश को जीवन में हो सकने वाली असंचारी रोगों जैसे मधुमेह, ह्दय रोग आदि के खतरे को कम करता है।
-स्तनपान से बच्चे की बौद्धिक क्षमता में 3 आई क्यू पॉइंट्स की वृद्धि होती है।
-स्तनपान शिशु के लिए संपूर्ण, सुलभ एवं सुरक्षित आहार है।
-जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात शिशु को स्तनपान कराने से शिशु मृत्युदर में 22 प्रतिशत तक कमी संभव है।
-प्रथम छह माह तक स्तनपान के अतिरिक्त शिशु को अन्य किसी भोज्य प्रदार्थ अथवा पानी की आवश्यकता नहीं होती है।
-6 माह के उपरांत स्तनपान के साथ साथ घर का ताजा बना हुआ ऊपरी आहार प्रारंभ करना चाहिए।
-जहां तक संभव हो दो वर्ष तक या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने से माताओं में 7 प्रतिशत तक स्तन कैंसर में कमी संभव है।
-बीमारी के दौरान भी बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए। जब तक चिकित्सक द्वारा निषेधित न हो।
-स्तनपान से 22 प्रतिशत तक बच्चों में संभावित मोटापे में कमी संभव है।
मां के दूध से बचता है पैसा और समय
कुछ महिलाएं फिगर खराब होने तो कुछ अरूचि के कारण भी बच्चों को स्तनपान कराने से बचती है। जबकि स्तनपान कराने से समय और धन दोनों की बचत होती है। साथ ही स्तनपान कराने से स्वयं महिला में भी स्तन कैंसर की संभावना कम होती है।
बतादें की अगर कोई महिला स्तनपान नहीं कराती है। और बच्चे को ऊपर का दूध या डिब्बे का दूध देती है। तो उससे समय और धन दोनों का अपव्यय होता है। मान लिजिए बच्चा 250 ग्राम दूध पीता है, जिसे गर्म करने के लिए करीब 10 मिनट गैस लगती है। इस प्रकार दूध का 10 रुपए और ईंधन का 5 रुपए प्रतिदिन भी जोड़ा जाए, तो 450 रुपए प्रतिमाह व सालाना 5400 रुपए का खर्च बैठता है। इसी के साथ समय खर्च होता है। वह अलग।
जिले में 23 शिशु मित्र अस्पताल
जिले में पहला शिशु मित्र अस्पताल वर्ष 2005 में जिला चिकित्सालय में प्रारंभ हुआ था, वहीं पूरे जिले में कुल 23 शिशु मित्र अस्पताल है।
वर्जन.
अगर कोई गर्भवती महिला अपने बच्चे को दूध नहीं पिलाती है। तो उसे अपना व्यवहार बदलना चाहिए। जन्म के तुरंत बाद एवं छह माह तक स्वयं का दूध ही बच्चे को पिलाना चाहिए। क्योंकि बच्चे के लिए यही सर्वोत्तम आहार है।
-चंद्रपाल सिंह राठौर, जिला आईसी सलाहकार
मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। बच्चे को छह माह तक दूध के अलावा अन्य कोई आहार देने की आवश्यकता ही नहीं होती है। क्योंकि मां के दूध में ही वह सब कुछ होता है। जिसकी एक बच्चे को जरूरत होती है। मां का दूध कम से कम दो वर्ष तक व अधिकतम जब तक दूध आए बच्चे को पिलाना चाहिए।
-डॉ. बीएल रावत, चाईल्ड स्पेशलिस्ट, एसएनसीयू प्रभारी


बड़ी खबरें

View All

ट्रेंडिंग