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नीमच. पत्रिका अखबार में १२ जुलाई के अंक में ऐसा क्या प्रकाशित हुआ था जो सतना के एक युवक को यह खबर नीमच तक खींच लाई। यहां आकर युवक ने वह स्थान देखा जिसके बारे में लिखा गया था तो वह प्रफुल्लित हो गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने भविष्य के जिन सुनहरे सपनों को वह संजो रहा था उनकी राह यहां आकर आसान हो गई।
जिला मुख्यालय से ५ किमी दूर कनावटी में अपने खेत में मात्र चार आरी क्षेत्रफल में जैविक पद्धति से तुरई की सब्जी की रेकार्ड पैदावार लेने वाले प्रभुलाल धनगर का खेत एग्रो टूरिज्म प्वाइंट बनता जा रहा है। पत्रिका ने १२ जुलाई के अंक में प्रभुलाल की इस खास उपलब्धि को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पत्रिका की इस खबर को पढ़कर सतना के एक युवा किसान कनावटी आए और प्रभुलाल से सब्जी की जैविक खेती करने के गुर सीखे।
गौरतलब है कि प्रभुलाल धनगर ने अपने खेत में मात्र चार आरी क्षेत्र में तुरई की फसल बोयी थी। बीज, जैविक खाद और उपचार करने में उनका अधिकतमक ढाई हजार रुपए खर्च हुआ। लेकिन तुरई का उत्पादन इतना जबरदस्त हुआ कि अब तक वे ६० हजार रुपए की सब्जी, मंडी में बेच चुके हैं। जुलाई में उन्होने प्रतिदिन २० से २५ किलो अच्छी गुणवत्ता की तुरई का उत्पादन लिया। एक बार तो ९० रुपए किलो तक तुरई बिकी। अब भी तुरई की पैदावार का सिलसिला जारी है।
पत्रिका में जब यह खबर सतना जिले की रघुराजनगर तहसील के टिलोरा गांव के ३२ वर्षीय मनोजकुमार खटिक ने पढ़ी तो उनसे रहा नहीं गया। मनोज की पुश्तैनी करीब एक बीघा जमीन है। वे मेडिकल पर सेल्समेन का काम करते हैं। प्रभुलाल की उपलब्धि ने मनोज को इस कदर प्रभावित किया कि वे खुद ही शुक्रवार को नीमच चले आए। यहां कनावटी का पता पूछते-पूछते प्रभुलाल के घर पहुंच गए। उन्हें पत्रिका की पेपर कटिंग दिखाई और खेती को अपने रोजगार का माध्यम बनाने की इच्छा जताई। प्रभुलाल ने अपने खेत पर ले जाकर मनोज को जैविक खेती का कमाल दिखाया। साथ ही क्यूनोवा, चिया और एजोला की खेती का नवाचार भी उन्हें दिखाया। मनोज ने नीमच जिले में पैदा होने वाली औषधीय फसलें अश्वगंधा, सफेद मुसली आदि के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। प्रभुलाल को मार्गदर्शन देने वाले आत्मा परियोजना अधिकारी डा.यतीन मेहता से भी भेंट की और उनसे खेती का ज्ञान लिया।
पत्रिका से चर्चा में मनोज ने बताया कि पत्रिका ने उन्हें रोजगार की नई राह दिखाई। प्रभुलाल के खेत को देखकर महसूस हुआ कि कम लागत में खुद का बेहतर कृषि रोजगार किया जा सकता है। वे अपने एक बीघा खेत पर सब्जी उत्पादन करने की मंशा रखते हैं। धीरे-धीरे वे औषधीय फसलों का उत्पादन भी करने के इच्छुक हैं।
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Published on:
03 Aug 2018 10:53 pm
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