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मैं हूं असली चौकीदार, नहीं मिला चार माह से वेतन

-लोकसभा चुनाव में चर्चा का विषय बना चौकीदार-वास्तविक चौकीदारों की जुबानी चौकीदार की कहानी

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मैं हूं असली चौकीदार, नहीं मिला चार माह से वेतन

नीमच. लोकसभा चुनाव से पहले चौकीदार पर जंग छिड़ गई है। कोई कहता है मैं चौकीदार हूं, तो कोई कहता है चौकीदार चोर है। इससे पहले चाय और पकोड़ों भी चुनाव में मुद्दे बन चुके हैं। वास्तव में चौकीदारों के हालात सबसे दयनीय है। जब जिला मुख्यालय के असली चौकीदारों से चर्चा की, तो किसी ने बताया कि हमें चार माह से वेतन नहीं मिला है, तो किसी ने कहा कि ८ से १२ घंटे काम करने के बाद जो वेतन मिलता है उससे पेट भरना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता है।
चार माह से नहीं मिला वेतन, ८ साल से कर रहे चौकीदारी
यंू तो कागजों में हमारा वेतन १० हजार से अधिक है। लेकिन हाथ में केवल ६५०० रुपए ही आते हैं। वह भी पिछले चार माह से नहीं मिला है। पिछले ८ साल से चौकीदारी कर रहे हंै। लेकिन न वेतन में बढ़ोतरी होती है न ही समय पर पैसा मिलता है। ऐसे में घर भी उधार लेकर चलना पड़ता है। यूं तो हम चौकीदार हैं। लेकिन सबसे अधिक हमारा शोषण हो रहा है।
-रमेश चंद्र खरारे, नरेंद्र शर्मा, चौकीदार, जिला चिकित्सालय, फोटो-०४२४
चौकीदार का काम कोई आसान काम नहीं है, कहने को तो मामूली पद है, लेकिन जिम्मेदारी दुनियाभर की है। पार्किंग से लेकर पूरे प्लाजा में अगर कहीं कुछ भी होता है तो मैनेजर से लेकर आम आदमी तक सबसे पहले चौकीदार को ढूढ़ता है। लेकिन सबसे अधिक दयनीय स्थिति चौकीदार की ही है। शासन से हमें कोई सुविधा भी नहीं मिली है। घर के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसका भी लाभ नहीं मिला। मजबूरी में मेरी पत्नी भी काम करने लगी है। तब जाकर थोड़ा गुजारा हो पाता है। मैं वर्ष २०१४ से काम कर रहा हूं। शुरूआत में ५००० हजार मिलते थे, अब कहीं जाकर ६५०० रुपए हुए हैं। उसमें भी गांव से आनाजाने का भाड़ा लगता है।
-रमेश पाल, चौकीदार, निजी प्लाजा,
हम ठेकेदारों के अधीन काम कर रहे हैं। यूं तो बैंक द्वारा संबंधित ठेकेदार को अधिक वेतन दिया जाता है। लेकिन हमारे हाथ में मात्र ६ हजार रुपए आते हैं। चौकीदारों की दुर्दशा हो रही है। सबसे बड़ा भ्रष्टाचार चौकीदारों के साथ ही हो रहा है। क्योंकि ठेकेदार संबंधित संस्था से तो मोटी रकम लेता है। लेकिन चौकीदार को चंद रुपए ही देता है। उज्जैन में हर गार्ड को कम से कम १२ हजार रुपए वेतन मिलता है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि हमें मात्र ६ हजार रुपए दिए जाते हैं। कुछ बोलने पर हमारी छुट्टी कर दी जाती है। हमारे स्थान पर दूसरे को रख लिया जाता है।
-दिलखुश अजमेरा, चौकीदार, निजी बैंक,
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