
विश्व क्षय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोग।
नीमच. पिछले एक साल में शासन क्षय (टीबी) रोगियों को करीब 22 लाख रुपए का भुगतान कर चुकी है। चौकाने वाली बात यह है कि इतनी बढ़ राशि में से करीब आधी राशि व्यसन में उपयोग हो रही है। इस बात को क्षय विभाग के अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।
प्रतिमाह दी जा रही 500 रुपए की राशि
क्षय रोगियों के सहायतार्थ पूर्व में विभिन्न एनजीओ आगे आते थे। एनजीओ टीबी से पीडि़त मरीजों के उपचार के लिए अपने स्तर पर सहयोग करते थे। यहां तक कि उनके पोषण आहार तक की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन पिछले एक साल से यह सुविधा लगभग बंद कर दी गई। इसकी प्रमुख वजह शासन की ओर से क्षय रोगियों को प्रतिमाह मिलने वाली नकद राशि। शासन की ओर से प्रतिमाह 500 रुपए की राशि पोषण आहार के रूप में टीबी के मरीजों को दी जा रही है। शासन का मानना है कि गरीबी में जीवन यापन करने वाले परिवारों में ही सबसे अधिक टीबी की बीमारी फैलती है। इसका मुख्य कारण पर्याप्त मात्रा में पोषण आहार नहीं मिलना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए शासन ने टीबी मरीज को पर्याप्त मात्रा में पोषण आहार मिले इसके लिए प्रतिमाह 500 रुपए देने का निर्णय लिया है। यह राशि सीधे मरीज के खाते में जाती है। इससे मरीज स्वयं के लिए पोष्टिक आहार की व्यवस्था करता है।
अब तक 22 लाख रुपए का किया भुगतान
क्षय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 2 हजार 80 क्षय रोगियों को अब तक शासन योजना अनुसार राशि का भुगतान किया जा चुका है। इन मरीजों को 22 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। शेष 1506 मरीजों को आगामी एक-दो दिन में राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आश्चर्य की बात है कि शासन ने मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए राशि देने का निर्णय लिया है, लेकिन लोग इस राशि का व्यसन में उपयोग कर रहे हैं। इसके कई उदाहरण सामने भी आ चुके हैं। एक ताजा उदाहरण ग्राम चीताखेड़ा में एक सामने आया। यहां जब टीबी के मरीज को पता चला कि उसे 500 रुपए शासन की ओर से मिलेंगे तो वो पत्नी से रुपए यह कहकर ले गया कि जल्द लौटा दूंगा। उस राशि का उपयोग व्यसन में कर लिया। विभाग की टीम जब मरीज को दवा देने पहुंची तो पत्नी ने सच्चाई बताई। विभाग के अधिकारी मानते हैं कि करीब 50 फीसदी राशि का गलत तरीकों में उपयोग किया जा रहा है।
औसत 48 लोगों की हर साल हो रही मौत
जिले में टीबी से हर साल औसत 48 लोगों की मौत होती है। इस संबंध में विभाग की ओर से जारी आंकड़ों से यह बात प्रमाणित होती है। विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में मौत की संख्या प्रतिशत में दी गई है। प्रतिवर्ष औसत 1200 मरीज सामने आते हैं। इनमें से औसत 4 प्रतिशत की हर साल मौत हो जाती है। इस मान से यह आंकड़ा 48 का बैठता है।
राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा
शासन की ओर प्रत्येक क्षय रोगी को 500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। यह राशि मरीज को पोषण आहार के लिए दी जाती है। यह बात सही है कि मरीज इस राशि का सही तरीके से उपयोग कम करते हैं। अब तक 2 हजार 80 मरीजों का करीब 22 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। शेष 1506 मरीजों को जल्द भुगतान किया जाएगा।
- डा. दिनेश प्रसार, जिला क्षय अधिकारी
Published on:
25 Mar 2019 02:03 pm
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