
लाल गोले के स्थान पर विकसित होगी आधुनिक औषधीय मंडी।
नीमच. यूं तो नीमच कृषि उपज मंडी प्रदेश की टॉप 10 मंडियों में शामिल है। जल्द ही नीमच की मंडी देश की पांच श्रेष्ठ मंडियों में शामिल हो जाएगी। देश की पांच मंडियों को विकसित करने के लिए आयुष मंत्रालय नई दिल्ली ने चुना है। इसमें नीमच की कृषि उपज मंडी भी शामिल है। करीब 51 करोड़ रुपए के लागत से औषधीय मंडी डुंगलावदा चंगेरा में विकसित होगी। यहां औषधीय के लिए प्रयोगशाला भी बनेगी।
औषधीय जिंसों में नीमच मंडी देश में प्रथम
कृषि उपज मंडी नीमच में 34 तरह की औषधीय जिंसें बिकने आती हैं। इनमें कलोंजी, तुलसी बीज, असालिया, सुवा, सतावरी, तारामीरा, किनेवा, फुफाडिय़ा, अजवाईन कण, तुलसी पत्ता, चिरायता बीज, असगंज बीज, डोलमी, आंवला गुठली, कोच बीज, स्टीवा, मेहंदी, पीली सरसों, अरंडी, सफेद मूसली, अरीठा, असगंध पत्ती, तुलसी पंचाग, नीम पत्ती, फुफालिया बीज, कंठीली, धामुका, शंखपुष्पी, अडुसा, राजमा, हिगोरिया, गुडबेल, अमलतास और ग्वारपाठा इस तरह हर साल कृषि उपज मंडी में सर्वाधिक औषधीय जिंसे बिकने आती है। इसी कारण औषधीय जिंसों की बिक्री में नीमच मंडी देश में प्रथम स्थान पर है। यही मुख्य वजह है कि देश की जिन 5 मंडियों को विकसित करने का निर्णय आयुष मंत्रालय नई दिल्ली ने लिया है उसमें नीमच मंडी भी शामिल है।
नेशनल मेडिसनल प्लांट बोर्ड प्रस्तावित
नीमच मंडी में आयुष मंत्रालय नेशनल मेडिसनल प्लांट बोर्ड ने योजना प्रस्तावित की है। इस योजना के तहत डुंगलावदा चंगेरा के यहां विकसित हो रही नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में 50 करोड़ 99 लाख 60 हजार रुपए की लागत से औषधीय मंडी विकसित होगी। नीमच कृषि उपज मंडी की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर आयुष मंत्रालय नई दिल्ली को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव में साढ़े 18 करोड़ रुपए की लागत से सीसी रोड, सवा 18 करोड़ में शेड, 96 लाख में गे्रडिंग लेब, 5 करोड़ में 22 गोदाम, सवा करोड़ में औषधीय पेकेजिंग हाल आदि बनाए जाएंगे। इसके बाद नीमच की कृषि उपज मंडी देश की श्रेष्ठ 5 मंडियों में शामिल हो जाएगी।
तीन बैठकों में बन चुकी है कार्य योजना
केंद्र सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजना में नीमच की कृषि उपज मंडी को शामिल करने के बाद अब तक तीन बैठकें आयुष मंत्रालय नई दिल्ली, भोपाल और एक बैठक नीमच में भी हो चुकी हैं। इन बैठकों में औषधीय मंडी को विकसित करने को लेकर कार्ययोजना बनाई गई। नीमच में हुई बैठक में फैडमेप नई दिल्ली के चेयरमैन जेआर रावल भी शामिल हुए थे। उन्होंने मंडी क्षेत्र का अवलोकन भी किया था। मंडी में आने वाली जिंसों की विस्तार से जानकारी ली थी। तीन बैठकों के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद यहां औषधीय मंडी विकसित करने का कार्य गति पकड़ेगा।
नीमच में आधुनिक औषधीय मंडी बनेगी
नीमच जिले में औषधीय फसलें बड़ी संख्या में आती हैं। यहं औषधीय जिंसों की आधुनिक मंडी विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। नीमच मंडी प्रशासन की और से प्रस्ताव भी बनाकर केंद्र आयुष मंत्रालय भारत सरकार को भेजा जा चुका है। अब तक दो-तीन बैठकें भी हो चुकी हैं।
- जेआर रावल, चेयरमैन फैडमेप नई दिल्ली
Published on:
09 May 2019 01:21 pm
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