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मुकेश सहारिया, नीमच. जहां एक ओर पुलिस के आला अधिकारी मादक पदार्थ तस्करों की धरपकड़ में दिनरात लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में दो तीन साल पहले पदस्थ रहे पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसा कोई आरोप नहीं लगा रहा है। पुलिस विभाग से मिले आंकड़े ही पुलिस के पूर्व अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों पर क्यों उठे सवाल यहां पढ़ें खबर
पिछले दो सालों से जिले में डोडाचूरा ठेके नहीं होने से तस्करी काफी बढ़ी है। इसका प्रमाण इसी बात से मिलता है कि पिछले दो सालों में ही 11 टन डोडाचूरा जब्त किया गया है। पिछले 5 साल सालों में जिले में कुल साढ़े 27 टन डोडाचूरा जब्त किया गया। पिछले दो सालों में ही सबसे अधिक एनडीपीएस के आरोपी भी पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं। पिछले दो सालों से नीमच जिले में डोडाचूरा के ठेके नहीं हुए हैं। इस कारण किसानों के यहां बड़ी मात्रा में डोडाचूरा पड़ा हुआ है। किसानों का दिनरात डोडाचूरा की चौकीदारी में ही बीत रहा है। दो साल से किसानों के यहां रखा डोडाचूरा तस्करों की नजर में भी है। ऐसे में जहां जिसको मौका मिल रहा है डोडाचूरा तस्करी पर हाथ साफ कर लेता है। पिछले दो सालों में डोडाचूरा तस्करी के मामले सामने आने का मुख्य कारण भी डोडाचूरा के ठेेके नहीं होना ही है।
पूर्व में रही है पुलिस की गतिविधि शंकास्पद
पुलिस अधिकारियों की माने तो पिछले पांच वर्षों में मादक पदार्थ तस्करी के सबसे अधिक प्रकरण दर्ज और आरोपियों की गिरफ्तारी वर्ष 2017 व 2018 में हुई है। इसका सीधा सीधा आशय यहीं निकल रहा है कि इससे पहले के वर्षों में ऐसा नहीं कि एनडीपीएस के प्रकरण दर्ज नहीं होते थे। पुलिस आरोपियों को पकड़ती तो थी, लेकिन मामला ऊपर की ऊपर रफादफा कर दिया जाता था। पिछले दो सालों में पुलिस अधिकारियों की सख्ती से भी इसका प्रकरण मिल रहा है। पिछले दो सालों में जितने प्रकरण बने उनमें सभी आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की बात कही गई। किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं गया। इससे भी इस बात की पुष्टि होती है कि पुलिस की वर्ष 2016 और इससे पहले के वर्षों में एनडीपीएस प्रकरणों में भूमिका संदिग्ध रही है।
पुलिस की सक्रियता का प्रमाण
पिछले दो सालों में पुलिस ने पूरी मुस्तैदी से एनडीपीएस के प्रकरणों में कार्रवाई की है। एक भी आरोपी को छोड़ा नहीं गया है। जब्त भी इसी कारण अधिक हुई है। जहां तक स्मैक कम मात्रा में जब्त होने का मामला है तो नीमच जिले में स्मैक नहीं बनती। न ही यहां स्मैक पीने वालों की संख्या अधिक है।
- तुषारकांत विद्यार्थी, पुलिस अधीक्षक
Published on:
03 Dec 2018 10:52 pm
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