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ऐसा क्या है इस मिट्टी में जो शरीर पर लगाने के बाद नहीं होता कोई रोग

ऐसा क्या है इस मिट्टी में जो शरीर पर लगाने के बाद नहीं होता कोई रोग

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ऐसा क्या है इस मिट्टी में जो शरीर पर लगाने के बाद नहीं होता कोई रोग

नीमच. मिट्टी में वह तत्व होते हैं जो शरीर से बीमारी फैलाने वाले तत्वों को बाहर निकाल फेंकती है। जिससे सम्पूर्ण शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ्य रहता है। चूकि हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है। इस कारण जल, वायु, पृथ्वी, आकाश, अग्नि इन पांचों तत्वों से की गई चिकित्सा से शरीर बिना किसी खर्चे के रोग मुक्त हो जाता है। प्राचीन काल से चली आ रही इस प्राकृतिक चिकित्सा का अब सरकार ने भी महत्व मना है।
यह बात रविवार को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित मिट्टी स्नान के अवसर पर प्राकृतिक चिकित्सक डॉ महेश शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि यह मिट्टी करीब 4 फीट गहरे गड्ढे से खोदकर निकाली गई मिट्टी है। जो शरीर से टॉक्सीन बाहर निकाल देती है। जिससे शरीर को कोई बीमारी नहीं होती है। इस कारण शरीर पूर्ण रूप से फीट रहता है। चूकि आधुनिक चिकित्सा काफी महंगी पड़ती है। इस मान से अगर हर व्यक्ति प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाए तो निश्चित ही वह बिना किसी खर्चे के हमेशा स्वस्थ्य रह सकता है।
आयुष मंत्रालय एवं आईएनओ के निर्देशन में गायत्री मंदिर परिसर में रविवार सुबह प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में विशाल मिट्टी स्नान का आयोजन हुआ। जिसमें प्रकृति प्रेमियों ने उपस्थित होकर मिट्टी से स्नान किया।
आठ दिनों तक चलेगा शिविर, रैली निकालकर करेंगे जागरूक
प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में गायत्री मंदिर परिसर में 08 दिवसीय शिविर का आयोजन गायत्री मंदिर परिसर में प्रात: 10 से 12 बजे तक होगा। जिसकी शुरूआत मिट्टी स्नान से रविवार को की गई। आयुष मंत्रालय के मंत्री श्रीपाद नाईक ने प्राकृतिक चिकित्सा को सम्मान देते हुए प्रत्येक 18 नवम्बर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। गायत्री मंदिर परिसर में शुरू हुए इस प्रकल्प में राजस्थान, मध्यप्रदेश के कई प्राकृतिक चिकित्सकों, महिला चिकित्सकों सहित नागरिकों ने भाग लिया।
डॉ शर्मा ने बताया कि 17 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 से 12 बजे तक शिविर में आने वाले लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा से निरोगी रहने के टिप्स बताए जाएंगे। इसी के साथ न्यूरोपैथी चिकित्सा का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। चूकि न्यूरोपैथी से शरीर के अंगों की जकडऩ दूर होने के साथ ही घुटने का दर्द, कमर का दर्द आदि दूर होते हैं। इस कारण दोनों चिकित्सा विधियों के माध्यम से शिविर में आने वाले को नि:शुल्क लाभ दिया जाएगा। इसी के साथ 18 नवंबर को प्रात: 9 बजे गायत्री मंदिर परिसर से एक जागरूकता रैली निकाली जाएगी। जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।
12 नवंबर से प्रारंभ हो रहे चिकित्सा शिविर में नीमच के प्रा.चि.डॉ. महेश शर्मा, हर्षदराय त्रिवेदी, युगल शर्मा, राधेश्याम दुबे, डॉ. एचएन गुप्ता, हरीश उपाध्याय, किशोर बागड़ी, एसएस पण्डित, केके कर्णिक, गुणवंत गोयल, जगदीश शर्मा, दिलीप चौबे, राजीव राय शर्मा, न्यूरोथेरेपी आयुर्वेद के प्रधान चिकित्सक प्रदीप राव मराठा, पुष्कर राठौर, कैलाश धाकड़, दुर्गां विश्वकर्मा, सुशीला सुथार, हुमेश अर्शी, ईरम जहां द्वारा अपनी कुशल चिकित्सा जनसामान्य को नि:शुल्क प्रदान की जाएगी। शिविर का समय प्रतिदिन प्रात: 10 से 12 बजें तक रहेगा।