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पहले की कह दिया था नश्वर शरीर किसी के काम आ जाए

नीमच की बेटी ने किए पूना में किया अंगदान

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नीमच. नेत्रदान और देहदान के क्षेत्र में नीमच विश्व प्रसिद्ध है। अब यहां की बेटी ने अनुकर्णीय पहल की है। बे्रन डेथ होने के बाद परिजनों ने लीवर और नेत्रदान किए हैं। इससे दो लोगें को नया जीवन मिला है।
माण्डोत परिवार ने किए अंगदान
नीमच की बेटी एवं पूना के मांडोत परिवार की बहू मंजुदेवी धर्म पत्नी मोहनलाल मांडोत ने मृत्यु से पूर्व अंगदान की स्वीकृति प्रदान कर अनुकर्णीय पहल की है। साथ ही नीमच का नाम रोशन किया है। 8 जुलाई 2018 की है मंजू माण्डोत को अचानक ब्रेन हेमरेज हो गया था उसे उसी समय अस्पताल पहुंचाया गया। डाक्टरों ने प्रयास किए किन्तु ब्रेन स्ट्रोक इतना खतरनाक था कि उसे ठीक नहीं किया जा सकता एवं ब्रेन डेथ हो गई। मंजू को पूना के रूचि हास्पिटल में रेन्टी लेकर पर रखा गया। 48 घंटे तक उसने जीवन के लिए संघर्ष किया, किन्तु उसमें डाक्टरों को सफलता नहीं मिली। डाक्टरों ने परिजनों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। मंजू के पति मोहनलाल मांडोत एवं भाई शशिकांत भामावत नीमच ने आपस में विचार विमर्श कर अंतिम निर्णय लिया की मंजू के शरीर के उपयोगी अंगों का दान किया जाए। इसी आधार पर रूबी अस्पताल पूना को इस सम्बंध में सूचना दी गई। इसके बाद मंजू के लीवर किडनी एवं नेत्रों का दान किया गया। पूना के बड़े शहर के लिए यह साहस भरा कदम वन्दनीय हो गया। रूबी हास्पिटल ने इस दान की सराहना की एवं एक प्रशस्ति पत्र परिजनों को प्रदान किया। मंजू मांडोत नीमच के स्वर्गीय शोभागमल भामावत की पुत्री एवं शशिकांत भामावत एवं रविकांत की बहन थीं। 59 वर्षीय मंजू धार्मिक संस्कारों की हंसमुख एवं उदार प्रवृति की महिला थीं। मोहनलाल मांडोत ने बताया कि मंजू हमेशा कहती थी कि यह नश्वर शरीर अगर मरने के पूर्व काम आए तो हमारा जन्म सफल हो जाए। मोहनलाल ने कहा कि मुझे क्या मालूम था कि मंजू ऐसी बातें करती है तो ये इसके जीवन में ही हो जाएगा। मंजू का 10 जुलाई को अंगदान के बाद निधन होने पर अंतिम संस्कार किया गया। अन्तिम संस्कार पूना में किया गया। इसमें नीमच, जीरन, रतलाम, इंदौर, पूना से जैन समाज के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।