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हर चार कदम पर बिक रहा मीठा जहर

- गर्मी की दस्तक के साथ बच्चों को परोसा जाने लगा सेकरीन- चंद रुपए के लालच में दुकानदार करते बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़

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बस स्टैंड पर इस प्रकार चुस्कियों की दुकानों पर लगी रहती है भीड़।

नीमच. गर्मी की शुरूआत के साथ ही शहर में हर चार कदम पर बर्फ से बनी चुस्कियों की दुकानें सज गई है। जिसे बच्चों से लेकर बड़े तक बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं मालुम की जिस चुस्की का आनंद वे धड्ल्ले से ले रहे हैं। वह अपनी गुणवत्ता पर खरी उतर रही है या नहीं, क्योंकि साल दर साल गर्मी के मौसम में मोटी कमाई करने के चक्कर में कुछ दुकानदार रंग को मीठा और स्वादिष्ट बनाने के लिए सेकरीन से लेकर अन्य सामग्रियों का उपयोग करते हैं। जो सेहत के लिए काफी नुकसानप्रद है। या यूं कहे की यह मीठे जहर का काम करता है।
बतादें की शहर में विभिन्न स्थानों पर गर्मी की शुरूआत के साथ ही चुस्कियों की दुकानें लग चुकी है, इन दुकानों पर पांच से दस रुपए में एक चुस्की बेची जाती है। जिसमें बर्फ के साथ ही विभिन्न प्रकार के रंगों का उपयोग भी किया जाता है। जिसमें रंगों को मीठा बनाने के लिए सेकरीन का उपयोग तो किया ही जाता है, क्योंकि शक्कर वर्तमान में ४० से ४५ रुपए किलो बिकती है। जिसे घोलने पर भी एक से डेढ़ लीटर से अधिक रंग या रस बनाया जा सकता है। वहीं सेकरीन करीब १७५ से २०० रुपए में एक किलो का पैकेट मिलता है, जिससे काफी मात्रा में रंग को मीठा किया जा सकता है। इस कारण दुकानदार चंद रुपए की लागत में मोटी कमाई करने के लिए सेकरीन का उपयोग करते हैं। जो व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसान दायक है।
शहर में ईन दिनों आम और खास सभी मार्गों पर चुस्कियों के ठेले लगे नजर आने लगे हैं। पत्रिका ने जब इन दुकानों पर नजर डाली तो शहर में जिला चिकित्सालय, बस स्टैंड, मैसी शोरूम चौराहे, अंबेडकर मार्ग, फव्वारा चौक, मनासा नाका, गायत्री मंदिर रोड, टेगौर मार्ग, विजय टॉकिज चौराहा, दशहरा मैदान आदि स्थानों पर चुस्कियों के ठेले सजे नजर आए, यहां ग्रहाकों को लुभाने के लिए ५ से १० रुपए में चुस्कियां परोसी जाती है। वहीं कुछ बच्चे चुस्की का रस पीने के बाद फिर से उसमें रस डलवाते हैं, तो दुकानदार भी बिना आनाकानी किए फिर से सूखी बर्फ की चुस्की को रंग से भर देता है, क्योंकि उसे वह रंग काफी कम दाम में पड़ता है, इस कारण उसे पांच से दस रुपए में एक चुस्की बेचने पर भी मोटी कमाई हो रही है, लेकिन वह निश्चित ही ग्रहाक के स्वास्थ्य पर सीधा असर करती है।
नाम न बताने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि आज के समय में शक्कर काफी महंगी हो गई है। इस कारण विकल्प के रूप में सेकरीन का उपयोग करते हैं। क्योंकि एक चम्मच सेकरीन से काफी पानी मीठा हो जाता है, फिर क्या है उसमें आवश्यकतानुसार रंग मिला लेते हैं। चूकि रंग जितना अधिक मीठा होता है, ग्रहाकों द्वारा उतना ही अधिक पसंद किया जाता है, अब पांच रुपए में कोई १० रुपए की शक्कर तो घोलकर नहीं दे देगा। उन्होंने बताया कि कई बार बच्चे एक चुस्की लेकर उसमें एक बार और रंग डलवा लेते हैं, ऐसे में अगर कोई भी दुकानदार शक्कर का उपयोग करेगा, तो निश्चित ही उसे कोई फायदा नहीं होगा, इस कारण मोटी कमाई करने के लिए सेकरीन का उपयोग तो करना ही है।
एक किलो सेकरीन से बनता २०० लीटर रंग मीठा
जहां पांच से दस किलो पानी को मीठा बनाने के लिए कई किलो शक्कर का उपयोग करना पड़ता है। वहीं एक किलो सेकरीन से करीब २०० से २५० लीटर पानी मीठा हो जाता है, इसी प्रकार जहां शक्कर से बने रंग में जल्दी कीड़े पडऩे व खराब होने की संभावना रहती है, वहीं सेकरीन से बना रंग कुछ दिन टिक जाता है, इस कारण अधिकतर दुकानदार इन दिनों सेकरीन का उपयोग धड्ल्ले से करते हैं।
वर्जन.
शीघ्र ही अभियान चलाकर विधिवत सेम्पलिंग की कार्यवाही की जाएगी, सभी सेम्पलों को फूड लेबोरेट्री भेजेंगे, जहां से रिपोर्ट आने पर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
-राजू सौलंकी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

किडनी, ब्रेन और हार्ट पर करती है असर
सेकरीन से गला खराब होता है, चूकि यह सिंथेटिक केमिकल की तरह होता है, जिसका स्वाद मीठा होता है, केमिकल के कारण सेकरीन का लंबे समय तक उपयोग करने से साईड इफेक्ट होते हैं, जिससे किडनी, ब्रेन, हार्ट और लीवर पर भी असर होता है। इस कारण सेकरीन का उपयोग नहीं करना चाहिए।
-डॉ एनके गोयल, मेडिकल विशेषज्ञ