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नीमच में चर्च की जमीन पर अवैध स्कूल बनाने का मामला उठा

- शिकायत के बाद भोपाल डायोसिस के बिशप मनोज चरण से ईओडब्ल्यू ने की पूछताछ शुरू

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नीमच में चर्च की जमीन पर अवैध स्कूल बनाने का मामला उठा

नीमच में चर्च की जमीन पर अवैध स्कूल बनाने का मामला उठा

नीमच। देश में मिशन की भूमि पर कब्जे और बेचने का खेल नया नहीं बल्कि वर्षो पुराना है। अब तक कई जिले में मिशनरी की करोड़ो की भूमि औने पौने दामों पर बैनामा या पट्टा कर दी गई है। जबकि इंडियन ट्रस्ट एक्ट के तहत अंग्रेजों के जाने के बाद मिशनरी की भूमि के देखरेख व संस्थाओं के संचालन का हक स्थानीय इसाइयों का है। वर्षो से चल रहे फर्जीवाडे के इस खेल के खिलाफ अब स्थानीय इसाई समाज के लोगों ने आवाज उठाई है। जिसे पत्रिका अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित कर फर्जीवाड़ा के खिलाफ प्रशासन को भी चेताया था। लंबी जांच बाद जबलपुर में ईसाई धर्मगुरु व पूर्व बिशप पीसी सिंह ने जबलपुर में ही नहीं बल्कि भोपाल डायोसिस की जमीनों में भी फर्जीवाड़ा करना सामने आया है। पीसी सिंह ने अपने रसूख के चलते नीमच की जमीन पर बज का स्कूल बनाकर कब्जा किया है। नीमच मसीह मिशनरी भूमि व परिसर में स्थित स्कूल और स्थान को लेकर सामने आ रहा है। स्थानीय ईसाई व मसीह मिशनरी चिल्ड्रन होम व अनाथालय की वार्डन परिना मंडलोई ने मसीह स्कूल का नाम परिवर्तन कर अन्य संस्था को सौंपने पर आपत्ति लगाई थी, वहीं मिशनरी की पुरानी चार दीवारी बनी होने के बाद भी यहां पर निर्माण बेफिजूल करवाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। यहां तक की भोपाल, जबलपुर, नीमच में स्कूल हथियाने के बाद शिक्षकों की नियुक्तियां भी कर डाली गई थी। इस बात की जानकारी भोपाल डायोसिस के बिशप मनोज चरण ने ईओडब्ल्यू को पूछताछ में दी है, मनोज चरण ने इसके अलावा भी पीसी सिंह द्वारा किए गए कारनामों के बारे में बताया है। इस घटना के बाद नीमच सीएनएन चर्च के पदाधिकारियों के बीच हडकंप मच गया है।

आपको बता दें कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की जबलपुर ईकाई में भोपाल डायोसिस के बिशप मनोज चरण ने पूछताछ में जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व बिशप पीसी सिंह ने नीमच में जमीन निजी ट्रस्ट जरोहा के नाम करा ली. जिसके लिए पीसी सिंह ने भोपाल डायोसिस के पदाधिकारियों व सदस्यों पर अपने रसूख के चलते दबाव बनाया था। भोपाल डायोसिस की नीमच में एक जमीन है, जिसपर स्कूल सहित चर्च व हॉस्टल का संचालन पूर्व बिशप पीसी सिंह द्वारा किया जाता था. जबकि नियम ये है कि एक डायोसिस दूसरे डायोसिस की जमीन स्थानान्तरित नहीं की जा सकती है. इसके बाद भी पूर्व बिशप पीसी सिंह ने अपने रसूख के चलते भोपाल डायोसिस की जमीन को जबलपुर डायोसिस में ट्रांसफर कराना चाही. यह संभव नहीं हो सका तो पीसी सिंह ने अपने प्राइवेट ट्रस्ट जरोहा के नाम पर जमीन करा ली। यहां तक कि अपना बोर्उ लगाकर एक स्कूल का संचालन भी शुरु कर दिया, महिला शिक्षक की नियुक्ति भी कर दी। अब ईओडब्ल्यू ने भोपाल डायोसिस की नीमच स्थित जमीन के कागजात व प्रापर्टी मैनेजर को नोटिस देकर बुलाया है। इतना ही नहीं वहां पर अपना बोर्ड लगाकर एक स्कूल भी संचालित करने लगा और जिस पर महिला टीचर की नियुक्ति तक कर डाली। भोपाल डायोसिस के के बिशप मनोज चरण ने पूछताछ में ईओडब्ल्यू के अधिकारियों को यह भी जानकारी दी है कि पीसी सिंह ने क्राइस्ट चर्च आईसीएसई कोएड स्कूल के खाते में भी रुपया ट्रांसफर किया था। इसके बाद पीसी सिंह ने कारण खरीदी थी। हालांकि उक्त कार को ईओडब्ल्यू की टीम द्वारा जब्त कर लिया गया है. गौरतलब है कि जबलपुर ईओडब्ल्यू एसपी देवेन्द्र प्रतापसिंह राजपूत के नेतृत्व में टीम के अधिकारियों ने पीसी सिंह के नेपियर टाउन स्थित आवास पर दबिश देकर एक करोड़ 65 लाख रुपए नगद, दो किलो सोना सहित बैंक के खातों का खुलासा किया था। इसके बाद जैसे जैसे आगे बढ़ती गई पीसी सिंह के कारनामें सामने आने लगे। पूर्व बिशप व ईसाई धर्मगुरु पीसी सिंह इन दिनों जबलपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक अभिरक्षा में है, इसके साथ ही बेटा पीयूष पॉल सिंह व खास गुर्गा सुरेश जैकब भी न्यायिक अभिरक्षा में है।

मसीह मिशनरी की जमीन पर निर्माण और बदलाव को लेकर हुआ विवाद उत्पन्न
मसीह मिशनरी चिल्ड्रन होम व अनाथालय की वार्डन परिना मंडलोई ने शिकायत देकर बताया था कि सीएनआई चर्च के पीछे पहले मसीह स्कूल के नाम से स्कूल संचालित था। सन् 1916 में सेंट एड्रयूज, सन् 1918 में टेंडपोल के नाम से स्कूल संचालित किया गया। अब जबलपुर की संस्था द्वारा सेंट जीरोहा जिरह सीनियर सैंकेंडरी स्कूल बनाया जा रहा है। जबकि अंग्रेजो के समय से यह मसीह मिशनरी की भूमि है, यहां पर मसीह स्कूल, मसीह अस्पताल, मसीह चिल्ड्रन होम व अनाथालय बना है और नर्सेज क्वार्टर है। जो कि 21 जून 1900 में खरीदा गया था। यह बंगला नंबर 56 में स्थित है। यह ट्रस्ट की भूमि है और यहां पर बिना अनुमति के नए कंस्ट्रक्शंन की अनुमति नहीं है। फिर भी स्कूल का नाम बदला जा रहा है, वहीं चार दीवारी का अलग से निर्माण किया जा रहा है। यहां की भूमि को धीरे-धीरे बेचने की योजना बन रही है। निर्माण कार्य करने वाली भी इंदौर की ठेकेदार फर्म है, जो कि मजदूर भी इंदौर से बाहर से लाई है। यह देर रात में काम करते है, डायल 100 को बुलाकर यहां काम भी रोका गया। जबकि मिशनरी भूमि की प्रोपर्टी डीड रजिस्टर्ड है। डीड के अंदर शर्त है कि आप संपत्ति को बेच नहीं सकते है और इसके टाइटल को बदल नहीं सकते है। जिसको लेकर विवाद हाई कोर्ट में चल रहा है।

झूठा धमकाने व मारपीट का कराया प्रकरण दर्ज
मिशनरी कंपाउड निवासी कृपाल सिंह मंडलोई ने बताया कि मिशनरी मिशनरी कंपाउड में रात को बिना नंबर की गाड़ी आ रही थीऔर चार दीवारी निर्माण कार्य बिना अनुमति के चल रहा था। सभी बाहर के ठेकेदार काम कर रहे थे। शिकायत की तो पता चला कि उनके खिलाफ झूठी गालीगलोज व मारपीट की शिकायत दर्ज करा दी गई। जबकि वह तो दिल्ली जंतर-मंतर पर नरेगा को लेकर विरोध आंदोलन में शामिल थे। वहां पर मीडिया में भी उनकी बाईट है। उसके बाद भी झूठे प्रकरण दर्ज कराकर यहां पर कब्जा करने के उद्देश्य से उन्हें दबाया जा रहा था। आज उनके भ्रष्टाचार का मामला प्रदेश में उजागर हो रहा है। जिसमें नीमच के लोगों की भी मिलीभगत है। अब स्कूल के बोर्ड हटाए जा रहे है, वही स्कूल का बदले नाम पर सफेदी पोत दी गई है। सीएनएन चर्च के पदाधिकारी पहले इस संस्था की पैरवी कर रहे थे और सही ठहरा रहे थे। अब मामले में कुछ नहीं बोल रहें हैं।

इनका यह कहना
नीमच में मसीह स्कूल, मसीह अस्पताल, मसीह चिल्ड्रन होम व अनाथालय है। जो कि चर्च ऑफ नार्थ इंडिया ट्रस्ट (सीएनएनआई) के अधीन है। पहले मसीह स्कूल ट्रस्ट का चलता था। अभी जबलपुर आईसीसी के तहत जीरोहा जिरह सी. सै. स्कूल का निर्माण हो रहा था। यह सभी भोपाल डायसिस से अनुमति के बाद हुआ है। ईडभ् बिशप पीसी सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अभी इस मामले में नीमच में भी जांच होगी। मुझे अधिक जानकारी इसके बारे में नहीं है।
- अशोक बैंजामिन, फादर सीएनएनआई चर्च

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