
कक्षा ९ वीं, १० वीं में संस्कृत भाषा की अनिवार्यता की हुई मांग
नीमच। एक ओर अमेरिका और यूरोप में संस्कृत प्राथमिक कक्षा के साथ पढ़ाई जाने लगी है। वहीं मध्यप्रदेश में कक्षा ९ वीं व १० वीं में संस्कृत की अनिवार्यता को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे निश्चित ही संस्कृत का विकास प्रभावित होगा। इस कारण संस्कृत भाषा को पुन: अनिवार्य किया जाना चाहिए।
यह बात संस्कृत भारती प्रांत न्यास सदस्य हरीश मंगल ने कही। उन्होंने बताया कि हमें अन्य पाठ्यक्रम चलाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन संस्कृत को हटाकर किसी और विषय को पढ़ाए जाने पर हमें आपत्ति है। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के जाने माने स्कूलों में संस्कृत को प्रमुखता से पढ़ाया जा रहा है। लेकिन भारत में इसे नजर अंदाज किया जा रहा है। वर्तमान में संस्कृत की अनिवार्यता खत्म की है। ऐसे में संस्कृत पढऩे वाले बच्चों की संख्या प्रभावित होगी। इससे भाषाओं के विकास के लिए जो फंड जारी होता है। उसमें भी गिरावट आएगी। जिससे संस्कृत भाषा का विकास भी प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी भाषा है। जिसका अभी तक कोई तोड़ नहीं है।
बतादें की माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा कक्षा ९ वीं एवं १० वीं में तृतीय भाषा संस्कृत विषय अनिवार्य के स्थान पर व्यवसायिक पाठ्यक्रम के चयन की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। इसी के चलते गुरुवार को संस्कृत भारती के पदाधिकारियों ने सीएम के नाम एसडीएम आदित्य शर्मा को ज्ञापन सौंपकर कक्षा ९ वीं १० वीं में संस्कृत विषय अनिवार्य करने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि मध्यप्रदेश में संस्कृत भाषा को समाप्त करने का षडयंत्र राज्य शासन, माध्यमिक शिक्षा अभियान एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कक्षा ९ वीं एवं १० वीं में तृतीय भाषा संस्कृत (अनिवार्य) के स्थान पर व्यवसायिक पाठ्यक्रम के चयन की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। जिसका दुरूपयोग करते हुए प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों पर दबाव बनाकर संस्कृत विषय के स्थान पर व्यवसायिक पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। राज्य मा. शिक्षा अभियान के अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग में मौखिक सूचना देकर प्राचार्यों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम संस्कृत भाषा के स्थान पर चलाने का दबाव बना रहे हैं। इसी के अनुसार प्राचार्यों द्वारा विद्यार्थियों को दवाब पूर्वक एवं भ्रमित कर संस्कृत के स्थान पर व्यवसायिक पाठ्यक्रम दिलवाया व पढ़ाया जा रहा है। पूर्व में भी प्रदेश के संभाग आयुक्तों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन उचित कार्यवाही नहीं होने के कारण पुन: गुरुवार को ज्ञापन सौंपकर कक्षा ९ वीं व १० वीं में संस्कृत भाषा की अनिवार्यता लागु करने की मांग की गई। अन्यथा उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी गई।
इस अवसर पर संस्कृत भारती के प्रांत न्यास सदस्य हरीश मंगल, विभाग संयोजक गोवर्धन, जिला संयोजक दिग्विजय, विकासखंड संयोजक गोविंद, शांतिलाल, नगर संयोजक अखिलेश सहित काफी संख्या में संस्कृत भारती के सदस्य उपस्थित थे।
Published on:
11 Aug 2017 02:12 pm
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