
जिले में नीलगाय के आतंक से ग्रामीण परेशान
नीमच। अन्नदाता पिछले दो-तीन सालों से हर स्तर पर समस्याओं से जूझ रहा है। इन दिनों रोजड़ों के आतंक से किसान परेशान हैं। इससे निपटने के लिए किसानों ने हजारों रुपए खर्च की खेतों पर तार व जाली लगाकर फसल बचाने का प्रयास किया, लेकिन इसमें भी आंशिक सफलता ही मिली। रोजड़ों का झुंड जाली व तारों को तोडक़र भी खेतों में प्रवेश कर जाता है। अब मजबूरी में अन्नदाता को 24 घंटे खेतों पर मौजूद रहकर फसल बचाने के लिए चौकीदारी करना पड़ रही है।
गांव मुंडला निवासी किसान अर्जुन सिंह बोराना के अनुसार खेतों में लगी रायड़ा, लहसुन, गेहूं, मैथी, हरी सब्जी नीलगाय के द्वारा प्रतिदिन नष्ट कर दी जा रही है। एक साथ 70 से 80 नीलगाय खेतों में प्रवेश करते है जिस खेत में झुंड जाता है उस खेत की फसल को चरने के अलावे बर्बाद भी कर देते है। नीलगायों के तांडव से मुक्ति के लिए किसानों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन भी दिया, लेकिन किसानों को राहत पहुंचाने की दिशा में आज तक कोई पहल नहीं किया जा सका है। जिससे किसानों में काफी आक्रोश व्याप्त है। नीलगायों से त्रस्त किसानों की माने तो बाधार में झूंड के झूंड नीलगाएं को भगाने के लिए कई बार प्रयास किया गया। इनके झूंड को खदेडक़र कई बार के समीप पहाड़ी के पार ले जाया गया। लेकिन अगले दिन वे पुन: लौट आते है। ऐसे में समझ में नहीं आ रहा क्या उपाय किया जाए।
जिले में हैं 21 हजार से अधिक हैं नीलगाय
जिले में करीब 708 आबाद गांव हैं। प्रत्येक गांव के क्षेत्रफल में 30 नीलगायों ने आतंक मचा रखा है। पिछले साल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 21 हजार से अधिक नीलगाय विचरण कर रही हैं। जिले में नीलगायों द्वारा औसत 4 लाख 24 हजार 800 रुपए का प्रतिदिन और फसल चक्र के पूरे चार माह में करीब 5 करोड़ 97 लाख रुपए से अधिक का नुकसान पहुंचाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के दौरे के दौरान जैसिंगपुरा, झांझरवाड़ा, धामनिया, महुडिय़ा, आसपुरा, बामोरा, पीठ, नयनखेरी, चीताखेड़ा, हरनावदा, राबडिय़ा, ग्वालदेविया, कराडिय़ा महाराज, ग्वाल तालाब, बमोरी, लॉछ, बाग पिपलिया, पिपलिया गुर्जर, लखमी सहित जिले के सैकड़ों गांवों के किसान वर्षों से नीलगाय के आतंक से त्रस्त हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने तो नीलगायों के आतंक की वजह से खेतों में बोवनी करना तक बंद कर दी। रात में अधिकांश किसान हाथ में टॉर्च लिए खेतों में खड़ी फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। इन दिनों खेतों में गेहूं, सरसों, चना आदि फसल खेतों में लहलहा रही है। खेतों में खड़ी फसल बचाने के लिए किसान सबसे अधिक मशक्कत कर रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि नीलगाय का झुंड फसल खाता कम है, लेकिन फसल पर लेटकर या दौडक़र नुकसान अधिक पहुंचाता है।
25 फीसदी का कहीं नहीं है जिक्र
नीलगायों के आंतक से जिले का अन्नदाता काफी परेशान है। हालात यह बन गए हैं कि किसान को दिनरात खेत पर ही रहकर फसलों की चौकीदारी करना पड़ रही है। पूर्व में आम आदमी पार्टी द्वारा किसान पंचायत लगाकर रोजड़ों की समस्या को राज्य स्तर पर प्रमुखता से उठाया गया था। अब एक बार फिर से नीलगाय समस्या के निराकरण के लिए किसानों को पहले जागरूक किया जाएगा। इसके बाद शासन और प्रशासन स्तर पर समस्या निराकरण के प्रयास किए जाएंगे।
- मोहन नागदा, किसान रेवली देवली ग्राम।
बैठक कर निकालेंगे हल
नीलगायों की समस्या से यदि किसान परेशान हैं तो इस संबंध मेें वन विभाग के अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी के साथ बैठक कर इसका उपाय किया जाएगा। किसान की अगर फसल अधिक खराब होती है तो वह वन विभाग में शिकायत देवें।
- क्षितिज कुमार, वनमंडलाधिकारी नीमच।
Published on:
02 Feb 2022 08:03 pm
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