
0% of India's retail business destroy
नई दिल्ली। देश के 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट जिसमें भारत में रीटेल व्यापार के कुल हिस्से में ई कॉमर्स का हिस्सा केवल 1.6% बताया है पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है की अब जबकि ई कॉमर्स व्यापार केवल 1 .6 % प्रतिशत ही है पर इसने देश के रीटेल व्यापार के 40 प्रतिशत हिस्से को नष्ट कर दिया है ।
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह नोट करना उचित है कि यदि केवल 1.6% ईकॉमर्स की बिक्री ने अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े खिलाड़ियों द्वारा अनैतिक व्यावसायिक प्रथाओं के कारण भारतीय खुदरा के मौजूदा पारिस्थितिकी तंत्र को संभावित रूप से नष्ट कर दिया है। तब भारत के छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए भविष्य बेहद अंधकारमय और गंभीर प्रतीत होता है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत की ईकॉमर्स व्यवसाय की लगभग 80 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इन दो बड़ी कंपनियों ने हमारे देश के ईकॉमर्स व्यवसाय के लिए सरकार की पॉलिसी और क़ानून के उल्लंघन की नीव रखी है । मार्केटप्लेस इकाई के रूप में उनकी प्रमुख जिम्मेदारी छोटे विक्रेताओं के व्यवसायों को संभावित खरीदारों से जोड़कर उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक स्वस्थ और संपन्न तकनीकी मंच तैयार करना था। लेकिन इसके विपरीत, उनके उल्टे और कटा हुआ व्यापार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करता है कि छोटे ऑफ़लाइन खुदरा व्यापारी नष्ट हो जाएँ और व्यापार को बंद कर दें ताकि उन्हें भारत के खुदरा बाज़ार में एक मजबूत मुकाम मिल सके।
यह नोट करना वास्तव में दर्दनाक है कि पिछले 12 महीनों में 50,000 से अधिक मोबाइल खुदरा विक्रेताओं, 30,000 इलेक्ट्रॉनिक्स खुदरा विक्रेताओं, लगभग 25,000 किराने और 35,000 कपड़ा खुदरा विक्रेताओं ने मुख्य रूप से इन ईकॉमर्स दिग्गजों के कारण अपना व्यवसाय बंद कर दिया है, जिन्होंने सरकार की एफडीआई नीति का उल्लंघन किया है और इसमें लिप्त हैं सूची नियंत्रण, लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना , भारी डिस्काउंट देना , तरजीही विक्रेता सिस्टम और अन्य प्रकार के उल्लंघनों का जारी रखना है । भारी छूट के कारण घाटे का वित्तपोषण करने के लिए उन्होंने एफडीआई राशि का उपभोग किया है। इसलिए अगर ऐसी कंपनियों को इस तरीके से विकसित होने दिया जाए, तो हम भारत के लिए एक अनिश्चित भविष्य के बारे में सोच सकते हैं।
बालकृष्ण भरतिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष कैट ने स्वीकार करते हुए कहा कि ईकॉमर्स इस नई पीढ़ी का व्यवसाय मॉडल है और इसमें भारत के रिटेल के परिदृश्य को बदलने की जबरदस्त क्षमता है, उम्मीद है कि सरकार तुरंत कदम उठाएगी और सुधारात्मक कदम उठाएगी ताकि भारत के ईकॉमर्स में मौजूदा विसंगतियां दूर हों। इस व्यवसाय का स्वस्थ मॉडल बनाया जाए जिससे एक समग्र और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके जो ऑनलाइन और साथ ही साथ खुदरा विक्रेताओं को फलने-फूलने के लिए उचित और समान अवसरों को प्रोत्साहित करे।
खंडेलवाल ने कहा कि भारत के छोटे व्यापारी ईकॉमर्स पर व्यापार करने के लिए बहुत उत्सुक हैं और कैट इस काम में इन छोटे व्यापारियों की सहायता करेगा लेकिन हम ऐसा तभी कर सकते हैं जब सरकार नीतियों के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार करे ।विदेशी या घरेलू कंपनी भारत के संप्रभु कानूनों की परिधि में एकाधिकार या अनुचित लाभ उठाती है जिससे भारत का छोटा व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । भारत के छोटे व्यापारी किसी भी प्रतियोगिता या तकनीकी उन्नयन के लिए से डरते नहीं है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और अत्यंत अस्वस्थ ईकॉमर्स वातावरण की विकट स्थिति के कारण ऐसे गहन पॉकेटेड वैश्विक दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करना असंभव है।
Updated on:
18 Dec 2019 07:22 pm
Published on:
18 Dec 2019 07:00 pm
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