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गुमनामी, क्षमता और तपस्या सिविल सेवकों के हैं आभूषण: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि गुमनामी, क्षमता और तपस्या सिविल सेवकों के आभूषण होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के हित के लिए कोई भी काम कुशलतापूर्वक तभी पूरा किया जा सकता है जब सभी को साथ लेकर काम किया जाता है।

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Anonymity, ability, austerity are ornaments of a civil servant: President Draupadi Murm

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार यानी आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में 97वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि "इस फाउंडेशन कोर्स का मूल मंत्र 'मैं नहीं हम' है। मुझे विश्वास है कि इस कोर्स के अधिकारी प्रशिक्षु सामूहिक भावना से देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाएंगे, जिनमें से कई आने वाले 10 से 15 सालों तक देश के बड़े हिस्से प्रशासन को चलाएंगे। इसके जरिए वह अपने सपनों के भारत को एक ठोस आकार दे सकते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी प्रशिक्षुओं ने जो मूल्य सीखे हैं, उन्हें सैद्धांतिक दायरे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। देश के लोगों के लिए काम करते हुए उन्हें कई चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में उन्हें इन मूल्यों का पालन करते हुए पूरे विश्वास के साथ काम करना चाहिए।

सुशासन का अभाव कई समस्याओं की जड़
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सुशासन समय की मांग है। सुशासन का अभाव हमारी कई सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की जड़ है। लोगों की समस्याओं को समझने के लिए आम लोगों से जुड़ना जरूरी है। राष्ट्रपति ने अधिकारी प्रशिक्षुओं को लोगों से जुड़ने के लिए विनम्र होने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने की भविष्य बचाने की अपील
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि पूरी दुनिया इन मुद्दों से जूझ रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे हमारे भविष्य को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पूरी तरह से लागू करें।

राष्ट्रपति ने LBSNAA के पूर्व व वर्तमान अधिकारियों की सराहना
राष्ट्रपति ने LBSNAA के पूर्व और वर्तमान अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि "हमारे देश के प्रतिभाशाली लोगों को सक्षम सिविल सेवकों में ढालने में पूर्व व वर्तमान अधिकारियों कड़ी मेहनत की हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुमनामी, क्षमता और तपस्या सिविल सेवकों के आभूषण होते हैं।

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