
आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) और उत्तराखंड के हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्यालय ने एक स्टडी में दावा किया है कि कोविड-19 के हाई रिस्क मरीजों का इलाज आयुर्वेद और योग से शायद प्रभावी हो सकता है।
आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) और उत्तराखंड के हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा की गई स्टडी में स्टैंडर्ड केयर ट्रीटमेंट के दिशानिर्देशों के तहत मरीजों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाएं निर्धारित की गईं। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करके एक व्यक्तिगत चिकित्सीय योग कार्यक्रम का संचालन किया गया। लगभग सभी मरीजों को डायबिटीज मेलिटस, उच्च रक्तचाप, क्रोनिक किडनी रोग, कोरोनरी धमनी रोग (जो कोविड-19 के मामलों में गंभीर परिणाम देने के लिए जाने जाते हैं) जैसी एक या अधिक साथ की बीमारियां (कोमोरबिडिटी) के कारण उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इन सभी मरीजों की उम्र 60 व इससे ऊपर थी। इस शोध में आईआईटी दिल्ली की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सोनिका ठकराल, प्रो राहुल गर्ग, हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्यालय से अल्का मिश्रा, दिल्ली के अद्वैत क्लीनिक से डॉ योगेश कुमार, ग्रेटर नोएडा से प्राइवेट प्रैक्टिशनर डॉ सुमित्रा शामिल रहे।
मरीजों को थेरेपी से ठीक होने की प्रक्रिया पर पड़ा प्रभाव
इस शोध में मरीजों के ट्रीटमेंट में आयुर्वेदिक दवाएं, रोज योग सत्र, जिसमें गहरी विश्राम तकनीक, प्राणायाम और बुनियादी आसन और कुछ जीवन शैली में संशोधन शामिल थे। डॉ सोनिका ठकराल ने जानकारी देते हुए कहा कि शोध में अधिकांश मरीजों ने बताया कि इस थेरेपी से उनकी ठीक होने की प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव पड़ा है। साथ ही कई लोगों ने अपनी साथ की बीमारियों के संबंध में भी सुधार का अनुभव किया है। उपचार के अंत तक, कई मरीजों ने अपनी जीवन शैली में योग को अपनाने का फैसला किया था। और कई ने अपनी साथ के रोगों (कोमोरबिडिटी)के प्रबंधन व उपचार के लिए टीम में आयुर्वेद डॉक्टरों की ओर रुख किया।
Published on:
13 Sept 2022 09:50 pm

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