नई दिल्ली

डिजिटल डाटा प्रोटेक्शन बिल को केबिनेट की मंजूरी

- संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है विधेयक

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Jul 05, 2023
डिजिटल डाटा प्रोटेक्शन बिल को केबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन विधेयक-2023 के मसौदे को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधेयक को मंजूरी मिलने के साथ ही यह विधेयक संसद में पेश किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने गत अप्रैल में एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को विधेयक मानसून सत्र में पेश किए जाने की जानकारी दी थी।

सूत्रों के अनुसार नया विधेयक पिछले साल संसद से वापस लिए गए बिल का संवर्द्धित स्वरूप है। इसमें निजी डाटा को सुरक्षित करने और जिम्मेदार कम्पनियों को जवाबदेह बनाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। देश के ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी डाटा विधेयक के दायरे में आएंगे। नया विधेयक संभवतः आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

विधेयक छह सिद्धांतों पर आधारित

सूत्रों ने बताया कि नया विधेयक छह सूत्रों पर आधारित है। इसमें डाटा एकत्रित व उपयोग करने, डाटा जरूरत पूरी तक ही संरक्षित रखने, जरूरी डाटा ही संग्रहीत करने, डाटा संरक्षण की गारंटी और उल्लंघन के मामलों को निपटाने के लिए डाटा संरक्षण बोर्ड का गठन शामिल है।

यह होंगे प्रावधान

-नया बिल सिर्फ व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा पर केंद्रीत रखा गया है यानी किसी व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं कर सकने वाला डाटा को जुर्माने आदि के प्रावधानों से मुक्त रखा गया है।
-बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल से पहले कंपनी को माता-पिता की सहमति लेनी होगी। बच्चों की ट्रैकिंग या बच्चों पर निशाना बनाकर विज्ञापन नहीं किया जा सकेगा। उल्लंघन पर 200 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।
-कम्पनियों को निजी डाटा का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित व्यक्ति से अनुमति लेनी होगी। ग्राहक अपना डाटा वापस भी ले सकेगा। डाटा सम्बन्धी मामलों की शिकायत आदि के मामले में बैंकों की तर्ज पर नॉमीनी का प्रावधान भी किया गया है।
-डाटा संग्रहण लिए कम्पनियों को नियम बनाने होंगे। डाटा को लम्बे समय तक संग्रहीत नहीं रखा जा सकेगा और शुरुआती जरूरत पूरी होने के बाद इन्हें हटाना जरूरी होगा।
-केंद्र सरकार ही अन्य देशों या क्षेत्रों को डाटा ट्रांसफर कर सकती है। कंपनियों को इसके लिए नियमानुसार अनुमति लेनी होगी।
-विधेयक के प्रावधानों के अनुरूप शिकायतों पर कार्रवाई के लिए भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड स्थापित होगा।

अब तक की कहानी

-जुलाई 2018 में जस्टिस बीएन कृष्णन के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ समिति ने प्रोटेक्शन डाटा बिल 2018 का मसौदा सौंपा आईटी मंत्रालय को।
-11 दिसम्बर 2019 को संसद में पेश किया गया विधेयक
-इसी दिन समीक्षा के लिए विधेयक भेजा गया संयुक्त संसदीय समिति को। सांसद मीनाक्षी लेखी बनी संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष बाद में पाली के सांसद पीपी चौधरी ने सम्भाली इसकी सदारत।
-चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी ने रिपोर्ट और विधेयक का मसौदा पेश किया संसद में।
-जेपीसी ने सुझाए विधेयक में 81 संशोधन। साथ ही सोशल मीडिया की जिम्मेदारी तय करने समेत 12 सिफारिशें भी की।
-जेपीसी की सिफारिशें समाहित करने का हवाला देते हुए सरकार ने 3 अगस्त को वापस लिया विधेयक

Published on:
05 Jul 2023 08:57 pm
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