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250 करोड़ का रियल एस्टेट ‘घोटाला’, साकेत कोर्ट के आदेश पर बिल्डर प्रमोटर्स पर FIR

शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाये गए है। रियल एस्टेट ग्रुप ने सैकड़ों घर खरीदारों को ठगा, काली कमाई को सहयोगी कंपनियों के जरिए छुपाया और स्टांप ड्यूटी, आयकर, जीएसटी की भारी चोरी की।

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दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई (Photo: IANS)

राजधानी दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने साकेत कोर्ट के निर्देश के बाद एक बड़े रियल एस्टेट समूह और उसकी सहयोगी कंपनियों के प्रमोटर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, इन प्रमोटर्स पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के माध्यम से करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का आरोप है।

यह मामला 15 जनवरी को एक निजी फर्म की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि गुड़गांव के धुनैला गांव में स्थित लगभग 8.86 एकड़ की बेशकीमती जमीन पर टाउनशिप विकसित करने के नाम पर उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी की गई है। दिसंबर 2016 में हुए एक समझौते के तहत 'सेंट पैट्रिक्स रियल्टी' (St Patrick’s Realty) को इस जमीन का विकास करना था। समझौते की शर्त यह थी कि डेवलपर, शिकायतकर्ता कंपनी को 10,635 वर्ग गज के विकसित आवासीय प्लॉट सौंपेगा। साथ ही यह भी तय हुआ था कि प्रमोटर्स अपना हिस्सा बेचने से पहले शिकायतकर्ता के हिस्से की जमीन उन्हें ट्रांसफर करेंगे।

शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि रियल एस्टेट ग्रुप के प्रमोटर्स ने भरोसा जीतने के लिए पहले दिल्ली के एरोसिटी स्थित कार्यालय और ताज मानसिंह जैसे पांच सितारा होटलों में कई बैठकें कीं। लेकिन बाद में उन्होंने समझौते का उल्लंघन करते हुए न तो प्लॉट दिए और न ही जमीन वापस की। एक सिविल मुकदमे के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ग्रुप ने शिकायतकर्ता की सहमति के बिना उनके हिस्से की जमीन को तीसरे पक्ष यानी आम खरीदारों को बेच दिया। आरोपियों ने खुद को जमीन का कानूनी मालिक बताकर खरीदारों को गुमराह किया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने इसी तरह के समझौतों के जरिए सैकड़ों करोड़ों रुपये जमा किए। पुलिस अब उन आरोपों की भी गहनता से जांच कर रही है जिनमें कहा गया है कि ग्रुप ने सैकड़ों घर खरीदारों को ठगा, अवैध कमाई को सहयोगी कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाया।

आरोप है कि प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन बाजार मूल्य से 40% कम पर दिखाकर स्टांप ड्यूटी, आयकर और जीएसटी की भारी चोरी की गई। शुरुआत में पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर अब ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।