
प्रतीकात्मक फोटो ( श्रोत Gemini)
RTO उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ड्राइविंग स्कूल ने मृत व्यक्ति के नाम पर ई-रिक्शा चलाने का ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इस लापरवाही से परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राजा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से जुड़ा है, जिसे आरटीओ मेरठ से मान्यता प्राप्त है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसे में मृत सुखवीर के नाम 10 दिवसीय ई-रिक्शा प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र जारी किया गया। यह ट्रेनिंग सर्टिफिकेट 10 अगस्त 2025 की तारीख का बताया जा रहा है जबकि सुखवीर की मृत्यु इससे कई माह पहले 1 मार्च 2025 को एक सड़क दुर्घटना में हो चुकी थी। इसके बाद जिला अस्पताल ने 21 अप्रैल 2025 को सुखवीर का डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था।
इसके बावजूद ड्राइविंग स्कूल की ओर से मृत व्यक्ति के नाम पर ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी होना गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। इतना ही नहीं, इस प्रमाण पत्र पर आरटीओ ट्रेनिंग मेरठ के काउंटर साइन होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह जांच का विषय बन गया है कि बिना भौतिक सत्यापन के यह प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ और इसकी पुष्टि किस स्तर पर की गई।
मामले के सामने आने के बाद एआरटीओ बुलंदशहर ने राजा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के प्रबंधक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में ड्राइविंग स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता रद्द करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
इस प्रकरण ने परिवहन विभाग और ड्राइविंग स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि मृत व्यक्ति के नाम पर प्रमाण पत्र जारी हो सकता है, तो फर्जी प्रशिक्षण और लाइसेंस की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
Updated on:
11 Feb 2026 01:11 pm
Published on:
11 Feb 2026 01:09 pm
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