
Abdul Rehman Faridabad murder: फरीदाबाद के जेल में हुई आतंकी की हत्या के मामले में पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच पिछले कई दिनों से राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी। इसी बीच रविवार को बहस इतनी बढ़ गई कि सहबंदी अरुण चौधरी ने संदिग्ध अब्दुल को पत्थर मार के उसकी हत्या कर दी। वहीं अब्दुल के पिता का कहना है कि अब्दुल बेगुनाह था। फिलहाल डीएलएफ क्राइम ब्रांच मामले की जांच में जुट गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम किया गया है।
जिला जेल नीमका में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के मामले की जांच शुरू हो गई है। पहले दिन पुलिस ने जेल के सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए और जांच के दौरान समिति ने सबूत भी इकट्ठा किए। साथ ही मामले की जांच डीएलएफ क्राइम ब्रांच फरीदाबाद को सौंप दी गई है। अब्दुल रहमान के शव का पोस्टमार्टम ईएसआईसी अस्पताल में भेजा गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम हुआ। उसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) संचिता सिंह की मौजूदगी में पुलिस प्रशासन ने जेल परिसर में घटनास्थल पर जाकर जांच की। इस दौरान मौके से जिस नुकीले पत्थर से हमला किया गया, वो पत्थर और वो कपड़ा बरामद किया गया जिसमें पत्थर बांधकर वार किए जाने की बात सामने आई। बरामद चीजों को पुलिस ने कब्जे में लेकर आगे की फॉरेंसिक जांच के लिए भेजकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एक सवाल तो यह भी बनता है कि इतनी कड़ी सुरक्षा रहने वाली जेल में इतनी बड़ी हिंसक घटना कैसे हुई। इसी बात का पता लगाने के लिए उस समय जेल में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी लिए गए हैं। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि उच्च सुरक्षा वाली जेल में हमले के लिए इस्तेमाल किया गया सामान आरोपी तक कैसे पहुंचा। एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम पूरे घटनाक्रम की धरातल से जांच-पड़ताल करेगी और सभी सबूतों को मिलने के उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या मंदिर पर हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार बंदी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की जिला जेल में हुई हत्या के मामले में नया खुलासा सामने आया है। जेल सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से सहबंदी अरुण चौधरी और अब्दुल रहमान के बीच राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी। बताया जा रहा है कि इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। अयोध्या मंदिर पर हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की जेल में हुई हत्या के मामले में मंगलवार को फरीदाबाद की ईएसआई मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम तीन सदस्यीय फॉरेंसिक मेडिकल बोर्ड ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट संचिता सिंह की निगरानी में किया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई। मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया।
आपको बता दें कि अब्दुल रहमान की रविवार देर रात सहबंदी के पत्थर से हमला कर देने के कारण मौत हो गई। अब्दुल रहमान यूपी के अयोध्या जिले के मिल्कीपुर क्षेत्र का रहने वाला है। अब्दुल घर का इकलौता बेटा और तीन बहनों का अकेला भाई था। पिछले साल मार्च में गांव पाली के खेत में बने एक कमरे से उसको गिरफ्तार किया था। उससे दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे और उन पर राम मंदिर पर हमला करने की साजिश रचने का आरोप था। गिरफ्तारी से पहले अब्दुल रहमान रिक्शा चलाने के साथ ही मीट की छोटी दुकान पर भी काम करता था। रहमान के परिवार की आर्थिक हालात कमजोर है। अब्दुल के सहारे किसी तरह परिवार का गुजारा हो जाता था। बेटे की मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है।
जिला जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की मौत के बाद उसका परिवार गहरे सदमे में है। इकलौते बेटे को खोने का दर्द उसके पिता अबू बकर की आंखों में साफ दिख रहा था। उन्होंने कहा कि अगर बेटा दोषी है तो कानून उसे सजा दे, लेकिन अगर वह बेगुनाह है तो उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए। अब्दुल रहमान अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और तीन बहनों का अकेला भाई था। उसकी बड़ी बहन आसमा 16 साल की, दूसरी बहन अल्फिया 13 साल की और सबसे छोटी अल्फिशा 6 साल की है। भाई की मौत से तीनों बहनों का सहारा छिन गया है। परिवार के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले अब्दुल रहमान रिक्शा चलाकर परिवार की मदद करता था। पिता अबू बकर भी रिक्शा चलाते हैं और मीट की छोटी दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। पिता का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन बेटे की मौत ने उनका विश्वास कमजोर कर दिया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
अब्दुल रहमान के पिता अबू बकर ने दावा किया कि उनके बेटे को हाईकोर्ट से जल्द जमानत मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि उनके वकील सुरजीत के अनुसार जमानत पर हुई सुनवाई उनके पक्ष में थी। राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई।
Published on:
11 Feb 2026 05:36 pm
