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लाइलाज जोड़ों के दर्द में आयुर्वेद के इलाज पर AIIMS में ट्रायल

छह महीने तक osteoarthritis के मरीजों पर आयुर्वेदिक इलाज के प्रभाव का आकलन आधुनिकतम वैज्ञानिक विधि और जांचों से किया जाएगा। अगर इलाज प्रभावी हुआ तो विश्व भर में इसके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही टॉप अस्पतालों में भी डॉक्टर ऐसे मरीजों को आयुर्वेदिक उपचार लिख सकेंगे  

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लाइलाज जोड़ों के दर्द में आयुर्वेद के इलाज पर AIIMS में ट्रायल

लाइलाज जोड़ों के दर्द में आयुर्वेद के इलाज पर AIIMS में ट्रायल

जोड़ों में दर्द की लाइलाज बीमारी ओस्टियो आर्थराइटिस को आयुर्वेद के माध्यम से इलाज के दावे को अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में परखा जाएगा। ऐसे मरीजों पर मल्टीमॉडल आयुर्वेदिक इलाज के प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। प्रभावी पाए जाने के बाद एम्स सहित एलोपैथी के टॉप प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर दवा के साथ ही मरीज को पंचकर्म भी लिख सकेंगे।

एम्स नई दिल्ली में रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने ‘पत्रिका’ को बताया कि इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि क्या ऐसे किसी मरीज को सिर्फ मौजूदा एलोपैथिक इलाज देने की बजाय साथ में आयुर्वेदिक इलाज भी उपलब्ध करवाया जाए तो ज्यादा प्रभावी होगा। इस अध्ययन में घुटने के ओस्टियो आर्थराइटिस के मरीजों को शामिल किया जाएगा। रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल के माध्यम से 150 मरीजों का छह महीने तक अध्ययन किया जाएगा।

डॉ. कुमार कहती हैं कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को ले कर विश्व भर में मांग बढ़ रही हैं ऐसे में हमें उनके प्रभाव के वैज्ञानिक आकलन पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए ही एम्स और केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के बीच समझौता किया गया है।

आयुर्वेद की ये दवाएं शामिल

अध्ययन में शामिल मरीजों के एक समूह को आयुर्वेद के अनुसार क्षीरबला तैल के साथ मात्रा बस्ती और धनवंतर तैल के साथ जानु बस्ती दी जाएगी। इसके साथ प्रति दिन दो बार खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ एक ग्राम लक्ष्य गुगुल और २५० एमजी मुक्ताशुक्ति भस्म की खुराक दी जाएगी। छह महीने एक समूह को जहां सिर्फ एलोपैथिक दवा तो दूसरे समूह को आयुर्वेदिक दवा भी दी जाएंगी। हर 30 दिन के बाद सभी मरीजों का परीक्षण किया जाता रहेगा। इस दौरान दवाओं के किसी कुप्रभाव पर भी लगातार नजर रखी जाएगी।

आकलन आधुनिकतम जांचों से

मरीजों पर अलग-अलग इलाज का क्या असर रहा यह जानने के लिए उनमें आए बदलाव का आकलन आधुनिकतम जांच के माध्यम से किया जाएगा। ऐसे मरीजों के आकलन के लिए उपयोग होने वाले आधुनिक वोमैक इंडेक्स स्कोर के अलावा घुटने में आए स्ट्रक्चरल बदलाव के आकलन के लिए एमआरआइ का उपयोग किया जाएगा। इसी तरह बोन मिनरल डेंसिटी के लिए डेक्सा स्कैन का उपयोग किया जाएगा।

ढाई करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित

जोड़ों के दर्द की बीमारी में ओस्टियो आर्थराइटिस सबसे प्रमुख है। अनुमान के मुताबिक भारत में 2.6 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं। ऐसे मरीजों को जोड़ों में बहुत दर्द होता है। ज्यादातर घुटने और पीठ में लोगों को यह समस्या होती है।

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