
दिल्ली में सरकारी संस्था पर बड़ी लापरवाही का आरोप।
Delhi: राष्ट्रीय राजधानी में पिछले करीब तीन महीनों से प्रदूषण ने गंभीर रूप ले रखा है। इसके लिए समय-समय पर रेखा सरकार प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ग्रैप-3 और ग्रैप-4 के तहत पाबंदियां लगाती रही है, लेकिन सामने आया है कि ग्रैप-3 और ग्रैप-4 की पाबंदियां होने के बावजूद एक सरकारी संस्था ने छतरपुर में 80 वॉशरूम का निर्माण कराया। इसपर संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को 10 दिनों के अंदर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
दरअसल, पिछले कई महीनों से दिल्ली में प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। बीच-बीच में तो स्थितियां इतनी गंभीर हो गईं कि लोगों को सांस लेने तक में परेशानी होने लगी। दूसरी ओर दिल्ली की रेखा सरकार प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके बावजूद एनजीटी को पता चला कि दिल्ली की सरकारी संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने ग्रैप-3 और ग्रैप-4 की पाबंदियों के दरम्यान अपने कार्यालय में लगभग 80 वॉशरूम बनाने के लिए तोड़फोड़ के साथ निर्माण कार्य चालू रखे।
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने ग्रैप-3 और ग्रैप-4 की पाबंदियों के बीच ऑफिस में तोड़फोड़ और निर्माण कार्य जारी रखा। 22 नवंबर 2025 को इसकी शिकायत छतरपुर निवासी शुभम वर्मा ने ग्रीन दिल्ली एप पर दर्ज कराई। शुभम का कहना था कि वह एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस नामक रोग से पीड़ित हैं। इसके साथ उनकी दो महीने की बेटी को भी उड़ने वाली धूल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं। दूसरी ओर, छतरपुर स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) के ऑफिस में पाबंदियों के बावजूद तोड़फोड़ और निर्माण कार्य जारी है। इससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
शुभम ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) पर ग्रैप-3 और ग्रैप-4 की पाबंदियों को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए शिकायत में बताया कि वह अपनी बेटी से सिर्फ इसलिए दूर हैं, क्योंकि उनकी बेटी को भी लगातार उड़ने वाली धूल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है। इस दौरान शुभम ने बेटी और खुद के इलाज में खर्च होने वाले सात लाख 11 हजार की भरपाई के रूप में मुआवजा मांगा। हालांकि उस दौरान शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास पहुंचा।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे गंभीर लापरवाही बताया। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि सरकारी संस्था द्वारा ऐसे उल्लंघन पर्यावरण और जनता के लिए बड़ा खतरा हैं। इसलिए इसपर कार्रवाई आवश्यक है। एनजीटी ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को आदेश दिया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। इसमें साइट का भौतिक निरीक्षण और घटना का सत्यापन किया जाए। अगर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो 10 दिनों के अंदर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई कर अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले रिपोर्ट प्रेषित की जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी।
Published on:
06 Jan 2026 04:35 pm
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