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High Court Decision: सरकारी नौकरी वाली पत्नी भी मुआवजे की हकदार…दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की बीमा कंपनी की दलील

High Court Decision: दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी वाली पत्नी को भी पति की मौत के बाद बीमा कंपनी से मिलने वाले मुआवजे की हकदार माना है। इसके साथ ही बीमा कंपनी के सभी दावे कोर्ट ने खारिज कर दिए।

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Delhi High Court Decision: सरकारी नौकरी वाली पत्नी भी मुआवजे की हकदार…दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की बीमा कंपनी की दलील

Delhi High Court Decision: दिल्ली हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की सभी दलीलें खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस नीना कृष्‍णा बंसल की पीठ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सड़क हादसे में मौत का शिकार बने युवक के परिवार को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ दो करोड़ 85 लाख 96 हजार 525 रुपये का भुगतान करें। लाभार्थियों में मृतक की पत्नी और मां भी शामिल हैं। दरअसल, मृतक की पत्नी पॉलिटेक्निक कॉलेज में लेक्चरर और मां पेंशनर है। इसलिए बीमा कंपनी ने इन दोनों लोगों को मुआवजे का हकदार नहीं माना था। घटना साल 24 प फरवरी 2014 की है। दिल्ली के हर्ष विहार क्षेत्र में सड़क पार करते समय बिजली कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को तेज रफ्तार बाइक सवार ने टक्कर मार दी थी। हादसे के बाद उन्हें गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान एक मार्च 2014 को उनकी मौत हो गई।

बीमा कंपनी ने पत्नी और मां को नहीं माना मृतक आश्रित

बिजली कंपनी में तैनात वरिष्ठ अधिकारी की हादसे में मौत के बाद बीमा कंपनी ने मृतक की पत्नी और मां को मुआवजा राशि का लाभार्थी नहीं माना। बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट को तर्क दिया कि मृतक की पत्नी सरकारी नौकरी में है और मां पेंशनर है। इसलिए ये दोनों बीमाधारक पर आश्रित नहीं हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस नीना कृष्‍णा बंसल की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी की दलीलें खारिज करते हुए कमाऊ पत्नी को भी मुआवजा पाने का हकदार माना है। हाईकोर्ट ने कहा “बेशक पत्नी सरकारी नौकरी कर रही है, लेकिन पति के अच्छे ओहदे पर रहने के दौरान यह महिला अतिरिक्त सुख सुविधा पा रही होगी। पति की मौत के बाद उसकी जीवन-यापन के तरीके में बदलाव आ सकता है, क्योंकि पति की आय बंद होने से वह उन सुख-सुविधाओं से वंचित हो जाएगी।”

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एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में लेक्चरर है मृतक की पत्नी

10 फरवरी को मामले में निर्णय सुनाते हुए जस्टिस नीना कृष्णा बंसल की पीठ ने मृतक अधिकारी की पत्नी और मां को भी दो बच्चों के साथ मुआवजा राशि का अधिकारी माना। पीठ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह मृतक के परिवार को नौ प्रतिशत ब्याज समेत दो करोड़ 87 लाख 96 हजार 525 रुपये का भुगतान करें। इसके साथ ही पीठ ने बीमा कंपनी की दलील खारिज करते हुए कहा “हर परिवार आमदनी के अनुसार जीवन यापन करता है। यदि परिवार की मासिक आय अधिक है तो उनका रहन-सहन का स्तर भी उतना उच्च व सुविधाजनक होगा।”

18 लाख रुपये की कटौती

अदालत ने आगे कहा “इस आय में कमी आने पर निश्चिततौर पर परिवार की उन सुख-सुविधाओं में कमी आएगी। जिससे कमाने वाले परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित होंगे। इसलिए यह कहना गलत है कि पत्नी व मां मृतक पर निर्भर नहीं थीं।” हालांकि पीठ ने निचली अदालत द्वारा जारी मुआवजा रकम में से 18 लाख रुपये की राशि की कटौती की है। यह कई मदों को ध्यान में रखते हुए की गई है। बीमा कंपनी को यह राशि संबंधित न्यायाधिकरण के समक्ष जमा करानी होगी। इसके बाद अदालत के नियमानुसार पीड़ित परिवार को राशि जारी की जाएगी।