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17 से ज्यादा बुलडोजर, 150 सिपाही और एमसीडी कर्मचारी…फैज ए इलाही पर कार्रवाई के दौरान बवाल पर क्या बोले मंत्री?

Delhi mosque demolition: दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने के दौरान हंगामा हुआ और पत्थरबाजी में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस मामले पर गृह मंत्री आशीष सूद भड़क उठे और उन्होंने आक्रमण करने वालों को असामाजिक तत्व कहा।

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delhi mosque demolition ashish sood statement over faiz e ilahi stone pelting

दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण की कार्रवाई को लेकर आशीष सूद की प्रतिक्रिया

Delhi mosque demolition: कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण वाली जमीन को हटाने की कार्रवाई के दौरान बहुत हंगामा हुआ। हालांकि मस्जिद की पूरी जमीन सुरक्षित है, उसके बाद भी कुछ शरारती तत्वों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए तनाव फैलाने की कोशिश की और इसी दौरान नगर निगम कर्मचारी और दिल्ली पुलिस पर पथराव किया गया। इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। इसी के चलते यह विषय चर्चा में बना हुआ है और अब इस पर दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिससे राजनीतिक हलचल भी अब तेज हो गई है।

आशीष सूद का बयान

आशीष सूद ने कहा कि फैज-ए-इलाही में अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के साथ तो कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन उसके बाद भी कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी की और कानून हाथ में लेने की कोशिश की। उनके खिलाफ अब दिल्ली पुलिस कार्रवाई कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून में इस तरह की हरकत दंडनीय अपराध है। अब तक इस मामले में 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाए आरोप

इस घटना को लेकर कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अवैध संरचनाओं को हटाना सही कदम है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार एक खास धर्म को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि एमसीडी और कोर्ट के आदेशों के विरोध में हिंसा करना तो सही नहीं है। साथ ही उन्होंने देर रात हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर यही कार्रवाई दिन में होती तो लोगों के पास अपने दस्तावेज दिखाने का मौका रहता।

जानिए क्या है पूरा विवाद?

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार देर रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली पुलिस और एमसीडी ने एक्शन लिया। 20 से ज्यादा बुलडोजर और 150 सिपाही और एमसीडी कर्मचारी के साथ यह कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद के आसपास सरकारी जमीन पर कुछ इमारतों ने कब्जा कर रखा था, जिस वजह से उन्हें गिराया गया। लेकिन जैसे ही यह कार्रवाई शुरू की गई, कुछ लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों पर पत्थरबाजी की। माहौल बहुत तनाव भरा हो गया था, जिस वजह से दिल्ली पुलिस को थोड़े बल का प्रयाग करना पड़ा और आंसू वाली गैस का प्रयोग किया। अब पुलिस इस मामले में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है और पूरे इलाके में दिल्ली पुलिस, रैपिड ऐक्शन फोर्स और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। पुलिस का कहना है कि अब पूरा इलाका अंडर कंट्रोल है और सभी टीमें मिलकर पूरे इलाके में नजर बनाए हुए हैं।

क्या था कोर्ट का आदेश?

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि मस्जिद केवल 0.195 एकड़ जमीन पर स्थित है। इसके अलावा जो भी इमारतें और संरचनाएं हैं, किसी के भी प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स पेश नहीं किए गए हैं, जिस वजह से वे अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं। और इसीलिए कोर्ट ने मस्जिद के आसपास की संरचनाओं को गिराने का आदेश दिया। वहीं मस्जिद समिति ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि यह वक्फ की संपत्ति है, जिस पर वक्फ अधिनियम लागू होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें बारात घर या क्लिनिक जैसी संरचनाओं को गिराने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इससे कब्रिस्तान प्रभावित हो रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।