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एक सुर में उठी बाल विवाह विरोधी सख्त कानून की मांग

- अक्षय तृतीया व ईद के मौके परिचर्चा में जुटे कई एनजीओ-सरकार से बाल विवाह निषेध कोष बनाने की भी मांग

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एक सुर में उठी बाल विवाह विरोधी सख्त कानून की मांग

एक सुर में उठी बाल विवाह विरोधी सख्त कानून की मांग

नई दिल्ली। नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की अगुवाई वाले कैलाश सत्यार्त्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (केएससीएफ) के बैनर तले जुटे देश के कई गैर सरकारी संगठनों ने बाल विवाह पर प्रभावी अंकुश के लिए सख्त कानून बनाने और तब तक मौजूदा कानून की सख्ती से पालना करने की आवाज उठाई है। आगामी 22 अप्रैल को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया व ईद के मौके पर आयोजित परिचर्चा में केंद्र सरकार से बाल विवाह निषेध कोष बनाने और 18 साल की उम्र तक के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान करने की मांग भी की गई।

फाउंडेशन बड़े पैमाने पर हो रहे बाल विवाहों के उन्मूलन के लिए गत वर्ष 16 अक्टूबर से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। इसके तहत यहां बाल विवाह विरोधी परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने एक सुर में कहा कि देश में भले ही बाल विवाह कराने वाले लोगों को दंडित करने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 जैसा विशेष कानून है। फिर भी बाल विवाह को समूल नष्ट करने के लिए मौजूदा कानून को संशोधित कर मजबूत बनाने की जरूरत है।

फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रियर एडमिरल राहुल कुमार श्रावत के अनुसार विशेष बाल विवाह निषेध कोष बनाने की मांग करते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ रही बच्चियों को प्रतिमाह 500 रूपए की छात्रवृत्ति दी जा सकती है, ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें। इन छात्राओं के लिए प्रधानमंत्री शगुन कोष का भी गठन किया जा सकता है। इससे विवाह योग्य हो जाने पर बच्चियों को सरकार 11 हजार रुपए का उपहार दे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक बाल विवाह की बुराई को 23% से घटाकर 10% तक करने तथा वर्ष 2030 तक इसे पूर्णतया समाप्त कर बाल विवाह मुक्त देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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