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200 किलो के उपग्रह को सिर्फ बर्बाद करने के लिए अंतरिक्ष में भेजेगी यूरोपीय स्पेस एजेंसी

अनोखा मिशन : री-एंट्री के दौरान सैटेलाइट टूटने का पता लगाने के लिए प्रयोग

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लंदन. यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट सिर्फ बर्बाद करने के लिए लॉन्च करेगी। सैटेलाइट उड़ान भरेगा, मंजिल तक पहुंचेगा और वापसी में खत्म हो जाएगा। ईएसए के इस प्रयोग का मकसद यह देखना है कि कोई सैटेलाइट पृथ्वी में री-एंट्री के दौरान किस तरह टूटता है।स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक मिशन का नाम डिस्ट्रक्टिव री-एंट्री असेसमेंट कंटेनर ऑब्जेक्ट (डीआरएसीओ) रखा गया है। इसके लिए यूरोप की एक कंपनी से अनुबंध किया जा चुका है। मिशन को 2027 में लॉन्च करने की योजना है। ईएसए के वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई सैटेलाइट कैसे टूटता है, इसका पता चलने पर भविष्य में सैटेलाइट्स को इस तरह डिजाइन किया जा सकेगा कि वे धरती पर गलत तरह से री-एंट्री के बावजूद टूटेंगे नहीं। स्पेस मिशन पूरा होने के बाद सैटेलाइट पृथ्वी के आसपास अंतरिक्ष में भटकते रहते हैं। कई बार पृथ्वी पर री-एंट्री कर जाते हैं।

सिर्फ कैप्सूल बचेगा

वॉशिंग मशीन जैसे आकार वाले सैटेलाइट का वजन करीब 200 किलो होगा। इसे टूटने के लिए डिजाइन किया जाएगा। इसमें 40 सेंटीमीटर का कैप्सूल लगाया जाएगा, जो सारा डेटा रिकॉर्ड करेगा और सुरक्षित रहेगा। सैटेलाइट टूटने के बाद कैप्सूल को पैराशूट के जरिए नीचे लाया जाएगा। सैटेलाइट में लगे चार कैमरे रिकॉर्ड करेंगे कि यह कैसे टूटता है।

पर्यावरण पर प्रभाव का भी पता चलेगा

इस मिशन से यह भी पता चलेगा कि किसी स्पेसक्राफ्ट की पृथ्वी पर री-एंट्री से पर्यावरण कितना प्रभावित होता है। स्पेसक्राफ्ट और उसके हिस्से हमारे वायुमंडल के साथ कैसे रिएक्ट करते हैं। उनके कारण कोई बायप्रोडक्ट बनता है या नहीं।