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फ्रेंडशिप डे : मौसम हुआ सुहाना, जमकर मस्‍ती करते दिखें दोस्‍त

कनॉट प्‍लेस में ही एक स्‍टोर के बाहर हाथ में फ्रेंडशिप बैंड लेकर खड़ी एक लड़की ने बैंड लेने और बिल चुकाने में ही उसे घंटों लग गए।

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फ्रेंडशिप डे : मौसम हुआ सुहाना, जमकर मस्‍ती करते दिखें दोस्‍त, मौसम भी रहा सुहाना

नई दिल्ली : दिल्‍ली में पिछले महीने लगातार बारिश होने के बाद से बारिश बंद है। हालांकि उस बारिश ने लोगों को काफी परेशान किया था। जगह-जगह जलजमाव हो गया था और दिल्‍ली में कोई ऐसा इलाका नहीं बचा था, जहां बारिश की वजह से परेशानी न पहुंची हो। इसके बाद अगस्‍त महीने की शुरुआत से तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया था। लेकिन आज सुबह अगस्‍त की पहली रविवार यानी फ्रेंडशिप डे के मौके पर मौसम ने भी दोस्‍तों को दोस्‍ती निभाने का भरपूर मौका दिया। मौसम ने ली अंगड़ाई और सुहाना हो गया और बारिश ने मजा भी किरकिरा नहीं किया।

दिल्‍ली के हर एरिया में मस्‍ती करते दिखे दोस्‍त
रविवार सुबह हल्की धूप के बाद दोपहर में आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद दोस्‍तों से दिल्‍ली गुलजार दिखी। सुबह से ही दोस्‍तों का लोदी गार्डन, इंद्रप्रस्‍थ पार्क, कनॉट प्‍लेस, सेंट्रल पार्क आदि जगहों पर तांता लगा रहा और उनके हाथ में फ्रेंडशिप बैंड और गुलाब का फूल नजर आया। इसके अलावा कई लोग गुलदस्‍ते हाथों में भी लिए दिखे। इस मौके पर कई कपल डेट करते भी दिखे।

फूलों और फ्रेंडशिप बैंड की हुई जमकर बिक्री
कनॉट प्‍लेस के पास बैठने वाले एक फूल वाले ने बताया कि आज फूल लेने के लिए लोगों की पूरे दिन भीड़ लगी रही। हालांकि इसमें युवाओं, खासकर लड़कियां ज्‍यादा थीं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि खरीदारी करने वालों में सिर्फ युवा ही थे। अधेड़ और बुजुर्गों की संख्‍या भी काफी थी। इतना ही नहीं बड़े-बड़े स्‍टोर्स तक का आलम यही था। वहां फ्रेंडशिप बैंड के लिए लोग चक्‍कर लगाते रहें। कनॉट प्‍लेस में ही एक स्‍टोर के बाहर हाथ में फ्रेंडशिप बैंड लेकर खड़ी एक लड़की ने बताया कि उसे एक बैंड लेने और बिल चुकाने में ही करीब एक घंटे से ज्‍यादा समय लग गया। इतनी भीड़ थी कि बिल चुकाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा।

बार और पबों में लगी रही भीड़
इतना ही नहीं दिल्‍ली के सारे मॉल में किसी पर्व जैसा नजारा था। वहां खुलेआम डांस करते और मस्‍ती करते दिखें युवक-युवतियां। मॉल के बार और पबों में तिल रखने की भी जगह नहीं थी, तो बाहर का नजारा भी कुछ ऐसा ही था, जितने लोग भीतर बैठे थे, उससे ज्‍यादा लोग बाहर इंतजार कर रहे थे।