
हर जगह गुलाल नहीं उड़ती, कहीं कोड़ामार तो कहीं फाड़े जाते हैं कपड़े
कुमार अनुज
जयपुर. उड़त गुलाल लाल भए बदरा, मारत भर-भर झोरी रे रसिया...ब्रज का यह रसिया इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। गुलाल-अबीर से आसमान रंगीन हो रहा है। लेकिन जरूरी नहीं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाई जाने वाली होली पर आसमान इसी तरह रंगीन हो। होली जगह-जगह पारंपरिक तरीकों से मनाई जाती है। कहीं लट्ठमार होली तो कही कोड़ामार होली। कहीं कपड़ा फाड़ होली तो कहीं कीचड़ की होली। जानिए देश में कैसे-कैसे खेली जाती है होली...
ब्रज : लट्ठमार होली
उत्तर प्रदेश के ब्रज (मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और आसपास का इलाका) की लट्ठमार होली प्रसिद्ध है। परंपराओं के अनुसार नंदगांव को हुरियारों को बरसाने की हुरियारिनें लट्ठ मारती हैं। हुरियारे रोकने के लिए ढाल का इस्तेमाल करते हैं। अगले दिन बरसाने के हुरियारे नंदगांव जाते हैं। ब्रज में एक माह तक होली के रंग उड़ते हैं। यहां लड्डुओं की होली भी खेली जाती है। इस होली को देखने के लिए दुनियाभर के लोग जुटते हैं।
बनारस : चिता भस्म की होली
उत्तरप्रदेश के बनारस (वाराणसी) की चिता भस्म की होली भी निराली है। मणिकर्णिका घाट (हरिश्चंद्र घाट) पर खेली जाने वाली होली में रंग और गुलाल के स्थान पर चिता की राख का इस्तेमाल किया जाता है। श्मशान में जलती चिताओं के बीच भगवान शंकर के भक्त मस्ती में डूबे नजर आते हैं। शिव बारात का भी आयोजन किया जाता है। यह आयोजन रंगभरी एकादशी को होता है। इस बार 8 क्विंटल से ज्यादा चिता की राख से होली खेली गई।
कुमाऊं : बैठकी और खड़ी होली
उत्तराखंड की बैठकी और खड़ी होली भी प्रसिद्ध है। ये होली संगीतमय होती हैं। बैठकी होली में गीत-संगीत का कार्यक्रम होता है। लोकगीतों गाए जाते हैं। खड़ी होली में लोग गीत गाते-गाते गुलाल खेलते हैं। लोकगीत कुमाऊंनी और गढ़वाली में होते हैं। यह सिलसिला एक माह चलता है। पकवान में आलू के गुटके और भांग की चटनी प्रचलित है।
इलाहाबाद : कपड़ा फाड़ होली
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में होलिका दहन के अगले दिन छोटी होली और उसके अगले दिन बड़ी होली मनाई जाती है। बड़ी होली के दिन पुराने शहर में लोकनाथ एरिया में होली खेलने वालों की भीड़ जमा होती है। डीजे और रंग के शॉवर लगाए जाते हैं। सभी लोग दोस्ताना माहौल में जमकर होली खेलते हैं। लोग नाचते-गाते हुए एक-दूसरे के कपड़े फाड़ते हैं।
राजस्थान : कोड़ामार होली
अजमेर जिले के भिनाय में कोड़ामार होली खेली जाती है। धुलंडी के दिन सुबह सब एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेलते हैं। शाम 4 बजे भिनाय के बड़ा बाजार में कोड़ामार होली होती है। लोग बड़े बाजार में एकत्र होते हैं। रस्से से तैयार किए कोड़ों को पानी में भिगोकर रखा जाता है। कोड़ामार होली खेलने वाले सिर पर साफा बांधते हैं। दो हिस्सों में बंटे ग्रामीण एक-दूसरे को कोड़े मारकर बाजार में निर्धारित दूसरे स्थान तक ले जाते हैं। दंगल खत्म होने पर सब गले मिलते हैं। यह सिलसिला तीन दिन चलता है।
बिहार : कीचड़ की होली
बिहार की राजधानी पटना के भोजपुरी होली केंद्र में भोजपुरी भाषियों की होली निराली होती है। होली के गाने गाए जाते हैं, इन्हें फगुआ कहते हैं। लोग लोकगीतों पर जमकर मस्ती करते हैं। यहां होली को भी फगुआ के नाम से जानते हैं। रंगों के साथ कीचड़ से भी होली खेली जाती है। छककर भांग पी जाती है।
Published on:
05 Mar 2023 11:43 pm
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