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सेहत की चिंता ने युवाओं में बढ़ाया नॉन-अल्कोहोलिक पार्टी का चलन

सुखद बदलाव : जनरेशन जेड चाहती है शराब से दूर रहकर मौज-मस्ती

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नई दिल्ली. नए साल का जश्न एक दिन दूर है। लोग तैयारियों में जुटे हैं। युवा और किशोर में अब नया चलन देखने को मिल रहा है। वे पार्टियों में मौज-मस्ती तो करना चाहते हैं, लेकिन शराब से दूर रहना चाहते हैं। जनरेशन जेड (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) के बीच नॉन-अल्कोहोलिक पार्टियों का चलन बढ़ा है। बाजार में बहुत सारे नॉन अल्कोहोलिक पेय उपलब्ध हैं। इन्हें गैर-अल्कोहोलिक स्पिरिट्स या जीरो प्रूफ स्पिरिट नाम से जाना जाता है। ये ड्रिंक दूसरे नॉन-अल्कोहोलिक ड्रिंक, जैसे जिंजर एले, सोडा या मॉकटेल से अलग होते हैं। ये डिस्टिलेशन, वनस्पति पदार्थों के मिश्रण और फ्लेवर का उपयोग कर उन्नत तकनीक से बनाए जाते हैं. ताकि परिष्कृत पेय का अनुभव प्रदान कर सकें।

इसलिए बदली आदत

युवाओं का कहना है कि कोरोना के दौरान बुरे अनुभव और सेहत के ख्याल के कारण आदत बदल गई। इन पेय में शराब जैसा स्वाद तो होता है, लेकिन कैलोरी बहुत कम होती है। शराब से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव और हैंगओवर भी नहीं होते।

शराब पर कम खर्च

स्टैटिस्टा के अनुसार जेनरेशन जेड पिछली पीढिय़ों की तुलना में शराब पर काफी कम खर्च कर रही है। बूमर्स, जेनरेशन एक्स और मिलेनियल्स ने 2022 में शराब पर 1.96 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं जेनरेशन जेड ने सिर्फ 25,618 करोड़ रुपए खर्च किए।