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हिंदी दिवस: मोदी सरकार में जानिए कैसे सत्ता के गलियारों में अंग्रेजी का दबदबा घटा और हिंदी का बढ़ा ?

- मोदी कैबिनेट का एजेंडा भी अब हिंदी में होता है तैयार - मंत्री और अधिकारी बैठकों से लेकर प्रेस कांफ्रेंस में हिंदी में ही ज्यादातर करते हैं बात - पूर्वोत्तर में भी हिंदी को मिल रहा बढ़ावा, 8 राज्यों में 22000 हिंदी शिक्षकों की हुई भर्ती

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नवनीत मिश्र
नई दिल्ली। केंद्र में वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद सत्ता के गलियारों में अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी का दबदबा बढ़ा है। अब मोदी सरकार में कैबिनेट का एजेंडा और ब्रीफिंग नोट भी हिंदी में तैयार होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सहित कई वैश्विक मंचों पर भी हिंदी में संवाद पर जोर दिए जाने से सरकार में शामिल गैर हिंदी भाषी मंत्री और अफसर भी इस भाषा में संवाद करते नजर आते हैं। केरल और तमिलनाडु से आने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री वी मुरलीधरन और एल मुरुगुन हों या फिर कई मंत्रालयों के सेक्रेटरी। बैठकों से लेकर प्रेस कांफ्रेंस तक सभी हिंदी को प्राथमिकता देते हैं।

गृह मंत्रालय में फाइलों की नोटिंग भी हिंदी में

गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी को बढ़ावा देने की कई पहल की है। अफसर फाइलों की नोटिंग हिंदी में तैयार करते हैं। गृहमंत्री अपनी बैठकों के लिए ब्रीफ भी हिंदी में तैयार कराते हैं। गौरतलब है कि गृहमंत्री शाह कई मौकों पर एक राष्ट्र-एक भाषा की वकालत कर चुके हैं। हिंदी पर उनके ज्यादा जोर देने से कई बार दक्षिण भारत के क्षेत्रीय दलों के नेता नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं।

वैश्विक स्तर पर हुई पहल

हिंदी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने वैश्विक स्तर पर भी कुछ पहल की है।मसलन, वर्ष 2018 में भारत सरकार की पहल पर विश्व भर में हिंदी भाषा से जुड़ी गतिविधियों की सूचना देने के मंच के तौर पर तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 14 मार्च 2018 को हिंदी सचिवालय का उद्घाटन किया था। विश्व हिंदी साहित्य का यहां सेंटर भी शुरू हुआ है। इसी तरह उज्बेकिस्तान में भी हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सेंटर खुल चुका है।

हिंदी शब्दकोष में संशोधन की तैयारी

गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल अप्रैल में संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए हिंदी शब्दकोश को संशोधित कर फिर से प्रकाशित करने का सुझाव दिया था। संसदीय राजभाषा समिति के चेयरमैन के रूप में अमित शाह का मानना है कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसका लचीला होना जरूरी है।

पूर्वोत्तर में भी हिंदी को बढ़ावा

केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वहां हिंदी भाषा को बढ़ावा देने की पहल की है। केंद्र की पहल पर पूर्वोत्तर के सभी 8 राज्यों ने दसवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने पर सहमति जताई है। पूर्वोत्तर के इन राज्यों में बच्चों की बेहतर हिंदी शिक्षा के लिए 22000 हिंदी शिक्षकों की भी भर्ती हुई है। पूर्वोत्तर के 9 आदिवासी समुदायों ने अपनी बोलियों की लिपियों को देवनागरी में कर लिया है।

नई शिक्षा नीति में राजभाषा पर जोर

केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं, मातृभाषा को पढ़ने और सीखने पर जोर दिया गया है। हिंदी, तेलुगू, तमिल, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की भी पहल की गई है।

तथ्य

- 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था।

- हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है

- विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए पहला विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ था।