
नवनीत मिश्र
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने 17 वीं लोकसभा के आखिरी सत्र समाप्त होते-होते पिछली मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ श्वेत पत्र लाने का बड़ा दांव चला। यूपीए सरकार के 10 वर्षों में किस तरह से अर्थव्यवस्था पाताललोक में पहुंच गई और मोदी सरकार ने कैसे उसे उबारा, कुल 59 पेज में बताने की कोशिश हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश श्वेत पत्र पर शुक्रवार को बहस होगी। मोदी सरकार ने श्वेत पत्र में 2 जी, कोयला, राष्ट्रमंडल, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले का जिक्र कर यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधा है।
श्वेत पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार को नाजुक अर्थव्यस्था विरासत में मिली थी। तब भारत सबसे कमजोर 5 अर्थव्यवस्था वाला देश था, लेकिन एनडीए सरकार ने 10 साल में टॉप 5 में पहुंचा दिया। सरकार ने यह भी कहा है कि शुरुआत में सरकार दयनीय अवस्था में श्वेत पत्र लाने से बचती रही, क्योंकि उससे निवेशकों का विश्वास डगमगा जाता। अब जब देश दुनिया की 5 वीं अर्थव्यवस्था बन गया है तो सरकार ने जनता को पिछली सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन से जागरूक करना जरूरी समझा। श्वेत पत्र में कहा गया है कि यूपीए सरकार ने वाजपेयी सरकार के सुधारों का शुरुआत में फायदा उठाया, लेकिन इसे आखिर तक भुनाने में नाकाम रही। यूपीए सरकार में दुनिया का भारत की क्षमता से भरोसा उठ गया था, अब मोदी सरकार में फिर बढ़ा है। यूपीए सरकार में विदेशी मुद्रा संकट था, अब हमारे पास 620 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। उस समय पॉलिसी पैरालिसिस(नीतिगत खामियां) की स्थिति थी, अब तेज गति से निर्णय होते हैं।
तीन भाग में श्वेत पत्र
भाग एक में यूपीए सरकार के दौरान 2004-14 के दौरान दोहरे अंकों की मुद्रास्फीति, बीमार बैंकिंग सेक्टर, राजस्व घाटे पर प्रकाश डाला गया है। जबकि भाग 2 में यूपीए सरकार के 10 साल में हुए 15 प्रमुख घोटालों का जिक्र है। भाग 3 में बताया गया है कि कैसे मोदी सरकार ने देश को सबसे कमजोर 5 अर्थव्यवस्था वाले देश से शीर्ष 5 अर्थव्यवस्था वाले देश में बदल दिया।
Published on:
09 Feb 2024 04:08 pm
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