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देश में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाम की तैयारी

डिजिटल प्रदूषण: सरकार बोली- हो रहा गंभीरता से विचार, गाजियाबाद सुसाइड बड़ा ट्रिगर पॉइंट नई दिल्ली। देश में बच्चों और किशोरों (16 वर्ष से कम आयु) के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियंत्रण की तैयारी है। हाल ही विदेशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन तथा आर्थिक सर्वेक्षण में सिफारिश किए जाने के […]

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डिजिटल प्रदूषण: सरकार बोली- हो रहा गंभीरता से विचार, गाजियाबाद सुसाइड बड़ा ट्रिगर पॉइंट

नई दिल्ली। देश में बच्चों और किशोरों (16 वर्ष से कम आयु) के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियंत्रण की तैयारी है। हाल ही विदेशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन तथा आर्थिक सर्वेक्षण में सिफारिश किए जाने के बाद केंद्र सरकार देश में ऐसे कानूनी उपाय लागू करने पर विचार कर रही है जिससे बच्चे व किशोर सोशल मीडिया से दूर हो सकें। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु-सीमा और नियमन के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए हितधारकों से बातचीत की जा रही है।

जानकार सूत्रों ने बताया कि आर्थिक सर्वे में बच्चों पर डिजिटल प्रदूषण पर चिंता जताए जाने के बाद से यह मुद्दा विचारणीय था लेकिन गाजियाबाद में सोशल मीडिया लत व ऑनलाइन गेमिंग के कारण तीन सगी बहनों की आत्महत्या को देश के नीति निर्माताओं की चर्चा का ट्रिगर पॉइंट माना जा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण-26 में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और युवाओं की मानसिक सेहत पर उसके असर को लेकर चिंता जताते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में ठोस नीति बनाने का सुझाव दिया गया था। केंद्रीय सूचना प्रौद्याेगिकी (आइटी) सचिव एस.कृष्णन ने कहा है कि सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय करने का मुद्दा सरकार की समीक्षा के दायरे में है। बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव को देखते हुए सरकार विभिन्न हितधारकों से परामर्श कर रही है और उचित समय पर इस बारे में निर्णय किया जाएगा।

आगे क्या हो सकता है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार आयु सत्यापन, पैरेंटल कंट्रोल, और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। बड़ा सवाल यह भी है कि कोई नियंत्रण नीति बनाने से पहले उस पर अमल सुनिश्चित करने के लिए फूल प्रूफ तकनीकी जरूरी होगी। बच्चों के सोशल मीडिया पर पूर्णत: बैन पर हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन संकेत साफ हैं कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा अब नीति-निर्माण का बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।

सोशल मीडिया का समाज पर प्रभाव का मूल्यांकन जरूरी-वैष्णव

हजारों वर्षों में निर्मित और मजबूत हुए सामाजिक सद्भाव और विश्वास पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर इसकी भूमिका का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। नवीनतम आर्थिक सर्वे ने बिल्कुल सही बात कही है। लेकिन कुछ चीजें केवल नीतिगत स्तर पर ही नहीं होनी चाहिए। ये ऐसे पहलू हैं जिनसे सिविल सोसायटी, शैक्षणिक संस्थान, स्वयं माता-पिता निपट सकते हैं और सरकार की नियंत्रण नीति इसमें मदद कर सकती है।

  • अश्विनी वैष्णव, सुचना प्रौद्योगिकी मंत्री

आर्थिक सर्वे में यह चिंता

  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम से उत्पादकता पर असर पड़ रहा
  • किशोरों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामलों में वृद्धि
  • एल्गोरिदम आधारित कंटेंट बच्चों को इको चैंबर में धकेल सकता है
  • सिफारिश बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर आयु
  • आधारित सीमा लागू हो। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उम्र सत्यापन, डिफॉल्ट सेटिंग्स, कंटेंट फिल्टर अनिवार्य हो।

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस कर चुके बैन, स्पेन में तैयारी

विदेशों में ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था और 6.50 लाख अकाउंट निष्कि्रय भी किए गए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में ऑनलाइन सेफ्टी कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों की सुरक्षा की सख्त जिम्मेदारी तय की गई है वहीं फ्रांस में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अभिभावक की सहमति अनिवार्य की गई है। स्पेन में भी बैन लगाने की तैयारी है।

गोवा-आंध्र प्रदेश कर रहे अध्ययन

देश में गोवा और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पहले कदम के रूप में समितियां गठित की हैं जो ऑस्ट्रेलिया के कानून का अध्ययन कर रही हैं। सरकारों ने माता-पिता की बच्चों के सोशल मीडिया में व्यस्त रहने की शिकायतों के लगातार वृद्धि के बाद कदम उठाया गया है।

आंकड़े बताते हालात

  • 82% बच्चे 14-16 वर्ष आयु के बच्चे करते स्मार्ट फोन का इस्तेमाल
  • 3-6 घंटे प्रतिदिन बिताते 9-17 साल उम्र के शहरी बच्चे