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असम में घुसपैठ, एनआरसी तो केरल में भ्रष्टाचार, एंटी इंकबेंसी बड़ा मुद्दा

नई दिल्ली। देश की चुनावी राजनीति में ‘विकास’ बनाम ‘पहचान’ की बहस नई नहीं है, लेकिन केरल और असम के विधानसभा चुनाव इस फर्क को बेहद स्पष्ट रूप में सामने ला रहे हैं। एक तरफ केरल है, जहां वोटर शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे गरमाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर असम में नागरिकता, घुसपैठ और पहचान की सियासत चुनावी विमर्श का केंद्र बनी हुई है।

दरअसल, केरल और असम में चुनावी सरगरमियां तेज हो चुकी है। प्रचार चरम पर है और आरोप-प्रत्यारोप के दौर के साथ नाराज नेताओं को मनाने का दौर जारी है। इस बीच मतदाताओं की पैनी नजर भी बनी हुई है।

केरलम: एलडीएफ की गवर्नेंस और यूडीएफ की गारंटी के बीच मुकाबला

केरल में लेफ्ट डेमोक्रेट्रिक फ्रंट (एलडीएफ) और युनाइटेड डेमोक्रेट्रिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच मुख्य मुकाबला है। जबकि नेशनल डेमोक्रेट्रिक एलायंस (एनडीए) इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हुई है। इस राज्य की साक्षरता दर 96 फीसदी है, जिसके चलते अधिकांश मतदाता नीति-आधारित फैसलों पर जनादेश देती रही है। यही वजह है कि स्वास्थ्य, शिक्षा के बेहतर मॉडल के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चुनावी एजेंडा तय करती हैं। जीत की हैट्रिक लगाने के लिए एलडीएफ अपनी कल्याणकारी नीतियों के साथ कोरोना, बाढ़ प्रबंधन के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा के ढांचे को चुनावी मुद्दा बना रही है। जबकि यूडीएफ की प्रमुख पार्टी कांग्रेस नेता सरकार की नाकामियों को गिनाने के साथ अपनी गारंटी योजनाओं को जनता के बीच रख रहे हैं। कांग्रेस ने महिलाओं में मुफ्त बस टिकट, युवतियों को एक हजार रुपए और 25 लाख रुपए तक स्वास्थ्य बीमा का वादा कर रही है। उधर, एनडीए ने एलडीएफ और यूडीएफ के एक-दूसरे के विरोधी होने को नाटक करार देते हुए इसे मुद्दा बनाया है। दोनों ही गठबंधनों की सरकारों के समय के घोटालों को भी मुद्दा बनाकर एनडीए ‘चमत्कार’ दिखाना चाहती है।

असम: हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने फिर उठाया घुसपैठ का मुद्दा

भाजपा यहां लगातार तीसरी बार जीतकर सरकार बनाने की हैट्रिक लगाना चाहती है। इसके लिए एक बार फिर से भाजपा ने बांग्लादेश घुसपैठ के साथ पहचान का मुद्दा उठा दिया है। भाजपा के हर नेता की जुबां पर यही मुद्दा दिख रहा है। वहीं मुख्यमंत्री हिंमता विश्व सरमा के मुसलमानों को लेकर आक्रमक बयानों के चलते चुनाव में ध्रुवीकरण भी तय दिख रहा है। इसके अलावा भाजपा को सबसे ज्यादा भरोसा एक बार फिर महिला मतदाताओं पर दिख रहा है। पिछले 10 मार्च को असम सरकार ने ओरुणोदय-3 योजना के तहत हर महिला लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे 9 हज़ार रुपए डाले हैं। जबकि कांग्रेस घुसपैठ के मुद्दे को सिर्फ चुनावी बता रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सरमा के भ्रष्टाचार के साथ विकास परियोजनाओं के नाम पर करीब 40,000 बीघा आदिवासी भूमि बड़े उद्यमियों को सौंपने को मुद्दा बना रखा है। दोनों ही ओर चुनाव प्रचार खासा आक्रमक बना हुआ है।

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