22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अनुशासनहीनता ही नहीं, नए समीकरणों से भी बढ़ी भाजपा की टेंशन

कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा के भीतर सिर्फ अनुशासनहीनता का संकट ही खड़ा नहीं किया है, बल्कि राज्य के भविष्य के राजनीतिक और जातीय समीकरणों को भी उलझा दिया है
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Abhishek Singhal

•

Updated: 26 Jun 2026, 2:50 PM IST

BJP Chhattisgarh

BJP Chhattisgarh: निकाय चुनाव में विधायकों-सांसदों की ड्यूटी(photo-patrika)

नई दिल्ली। कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा के भीतर सिर्फ अनुशासनहीनता का संकट ही खड़ा नहीं किया है, बल्कि राज्य के भविष्य के राजनीतिक और जातीय समीकरणों को भी उलझा दिया है। एक तरफ जहां देशभर में भाजपा अपनी मजबूत कैडर और कड़े अनुशासन के लिए जानी जाती है, वहीं कर्नाटक की इस घटना ने प्रदेश नेतृत्व की विधायकों पर पकड़ और आगामी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि यह मामला सिर्फ कुछ वोटों के इधर-उधर होने का नहीं, बल्कि दक्षिण के इस अहम राज्य में 'वोक्कालिगा' वोट बैंक की रीढ़ माने जाने वाले जेडीएस गठबंधन के भविष्य से भी जुड़ा है।

सख्त रुख: जब व्हिप था, तो चूक कैसे हुई?

हाल ही में दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, नेता प्रतिपक्ष आर अशोक और राज्य प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के साथ बैठक की। राज्य के नेताओं का कहना था कि जोखिम को देखते हुए जेडीएस को अतिरिक्त सीट पर प्रत्याशी खड़ा ही नहीं करना चाहिए था। केंद्रीय नेतृत्व ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा- 'जब एक बार आलाकमान ने प्रत्याशी तय कर दिया और व्हिप जारी हो गया, तो क्रॉस वोटिंग की हिम्मत किसने और क्यों की?' मामले की तह तक जाने के लिए सीटी रवि के नेतृत्व में एक 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी' का गठन किया गया है। पार्टी इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ऐसी कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिससे देशभर के कैडर में एक सख्त संदेश जाए।

वोटों का गणित: कहां लगी सेंध?

224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में सीटों और वोटों के गणित में भीतरघात ने भाजपा- जद (एस) का खेल बिगाड़ दिया। कांग्रेस अपने बूते चार सीटें आसानी से जीत रही थी, लेकिन क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाकर उसने 5वीं सीट भी झटक ली। इसके साथ ही विधान परिषद में कांग्रेस का आंकड़ा 34 से बढ़कर 39 हो गया है। भाजपा के पास 63 विधायक थे। रणनीति के तहत प्रथम वरीयता के 30-30 वोट दो पार्टी प्रत्याशियों को और बचे हुए 3 वोट सहयोगी दल जेडीएस को जाने थे। एक समर्थित का भी वोट जेडीएस को जाना था। लेकिन भाजपा के दूसरे उम्मीदवार को सिर्फ 27 वोट ही मिले। पार्टी को संदेह है कि भाजपा के 3 से 6 विधायकों ने पाला बदला है। वहीं, खुफिया इनपुट यह भी है कि जेडीएस के भी 6-7 विधायक पार्टी लाइन से भटक गए।

वोक्कालिगा में शिवकुमार का बढ़ता 'कद' इस क्रॉस वोटिंग के पीछे असली चिंता जातीय समीकरणों को लेकर है। दिल्ली की बैठक में प्रदेश इकाई के एक धड़े ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि जेडीएस विधायकों में बिखराव गठबंधन के कमजोर होने का संकेत है। डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राज्य की वोक्कालिगा राजनीति करवट ले रही है। शिवकुमार इसी समुदाय से आते हैं और इसमें उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। पारंपरिक रूप से वोक्कालिगा समुदाय जेडीएस के पास माना जाता था, लेकिन इस क्रॉस वोटिंग को जेडीएस के घटते प्रभाव और शिवकुमार के बढ़ते वर्चस्व के रूप में देखा जा रहा है।

भावी रोडमैप पर काम

डैमेज कंट्रोलः भाजपा के भीतर अब एक नए नैरेटिव पर चर्चा शुरू हो गई है। शिवकुमार के उभार का मुकाबला करने के लिए भाजपा के भीतर ही मजबूत वोक्कालिगा चेहरों को आगे बढ़ाया जाए।

- त्रिकोणीय सोशल इंजीनियरिंग: केवल एक समुदाय के भरोसे रहने के बजाय लिंगायत, वोक्कालिगा और ओबीसी वर्गों को एक साथ जोड़कर एक नया और अभेद्य सोशल कॉम्बिनेशन तैयार किया जाए।

- कर्नाटक भाजपा के लिए यह समय सिर्फ बागियों को सजा देने का नहीं, बल्कि कांग्रेस के बढ़ते चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अपनी जमीन को दोबारा मजबूत करने का है।

बड़ी खबरें

View All

नई दिल्ली

दिल्ली न्यूज़

ट्रेंडिंग