
Nitin Gadkari
नई दिल्ली। देश में भले ही हाइवे का जाल तेजी से फैल रहा हो, लेकिन टोल वसूली का मुद्दा भी बना हुआ है। हाइवे निर्माण की लागत निकलने के बाद भी टोल वसूली जारी रहने पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसा ही कुछ जयपुर-दिल्ली के नेशनल हाइवे 48 (पुराना एनएच-8) पर हुआ है। जहां पिछले 16 साल में सडक़ परिवहन मंत्रालय ने 8 हजार 919 करोड़ रुपए हाइवे पर खर्च किए हैं। जबकि टोल वसूली इससे कही ज्यादा 11 हजार 945 करोड़ रुपए की हो चुकी है।
दरअसल, इस तरह की जानकारी केन्द्रीय सडक़ व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल के लिखित जवाब में दी है। बेनीवाल ने निर्माण लागत के बावजूद टोल वसूली जारी रखने के साथ खस्ताहाल सडक़ों पर टोल वसूली के औचित्य पूछा था। गडकरी ने लिखित जवाब में बताया कि नेशनल हाइवों पर टोल वसूली नियमों के तहत होती है। जो थोक मूल्य सूचकांक से अनुक्रमित नेशनल हाइवे की प्रति किलोमीटर आधार दर पर तय होती है। जयपुर से दिल्ली हाइवे के दो खंड है। गुडग़ांव-कोटपुतली-जयपुर खंड पर ज्यादा वसूली हुई है। जबकि इसके मुकाबले गुडग़ांव-दिल्ली पर टोली वसूली कम है। गडकरी का जवाब में कहना है कि टोल शुल्क में छूट नहीं दी जाती है, जिसकी वजह से इसकी निर्माण लागत से तुलना नहीं की जा सकती है।
देश के नेशनल हाइवों पर 1063 टोल नाके हैं, जिनमें से अकेले राजस्थान में 163 टोल नाके हैं। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक है। इसके अलावा जयपुर-दिल्ली हाइवे पर स्थित शाहजहांपुर टोल नाका देश के सर्वाधिक टोल वसूली वाले नाकों में शुमार है
| नेशनल हाइवे खंड टोल वसूली | लागत | रख रखाव खर्च |
| गुडग़ांव-कोटपुतली-जयपुर | 9218.30 | 6430 |
| दिल्ली-गुडग़ांव | 2727.50 | 2489.45 |
Published on:
21 Mar 2025 03:34 pm
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